परिषदीय विद्यालय के कक्षा आठ के छात्र का कड़े से सिर फोड़ा, सीएचसी में कराया गया इलाज; पिता ने पुलिस को दी तहरीर
गंजमुरादाबाद उन्नाव। स्कूलों में छात्रों के बीच होने वाली मामूली कहासुनी अब मारपीट का रूप लेने लगी है। गंजमुरादाबाद क्षेत्र में एक सप्ताह के भीतर हाथ में पहनने वाले कड़े से छात्रों के साथ मारपीट की दो घटनाएं सामने आने के बाद विद्यालयों में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामला कस्बा गंजमुरादाबाद स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय से सामने आया है, जहां कक्षा आठ के एक छात्र के सिर पर कथित तौर पर हाथ के कड़े से वार कर उसे घायल कर दिया गया। घायल छात्र को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसका इलाज किया।
जानकारी के अनुसार, गांव गुलबहा निवासी निखिल कस्बा गंजमुरादाबाद स्थित उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा आठ का छात्र है। छात्र के मुताबिक, सोमवार को विद्यालय में किसी बात को लेकर उसकी दूसरे छात्र से मामूली कहासुनी हो गई थी। बताया गया कि विद्यालय की छुट्टी के बाद जब वह स्कूल गेट के पास पहुंचा, तभी दूसरे छात्र ने हाथ में पहने कड़े से उसके सिर पर कथित तौर पर वार कर दिया। अचानक हुए हमले से निखिल घायल हो गया और उसके सिर से खून निकलने लगा।
घटना के बाद विद्यालय परिसर और आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। घायल छात्र को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। चिकित्सकों ने छात्र का प्राथमिक उपचार किया। घटना की जानकारी मिलने पर परिवार के लोग भी अस्पताल पहुंच गए और छात्र का हाल जाना।
पिता ने पुलिस को दी तहरीर
घटना से नाराज घायल छात्र के पिता ने पुलिस को तहरीर देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। परिजनों का कहना है कि विद्यालय में छात्रों के बीच होने वाली मामूली कहासुनी को समय रहते नियंत्रित किया जाना चाहिए, ताकि बात मारपीट तक न पहुंचे। उनका आरोप है कि यदि छात्र के हाथ में कड़ा नहीं होता तो चोट इतनी गंभीर नहीं होती। हालांकि, घटना को लेकर विद्यालय स्तर पर भी जानकारी जुटाई जा रही है। शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित शिक्षक से स्पष्टीकरण लेने की बात कही है।
खंड शिक्षा अधिकारी संजय कुमार ने कहा कि विद्यालय के शिक्षक से पूरे मामले को लेकर स्पष्टीकरण लिया जाएगा। जांच के बाद तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।
इसी सप्ताह इंटर कॉलेज में भी हुआ था विवाद
हाथ में पहने जाने वाले कड़े से मारपीट का यह पहला मामला नहीं है। इसी सप्ताह मंगलवार को क्षेत्र के गांव अटवावैक निवासी कक्षा 12 के छात्र अवनीश ने बेहटा मुजावर पुलिस को तहरीर देकर मारपीट की शिकायत की थी। छात्र ने आरोप लगाया था कि गांव स्थित इंटर कॉलेज में मामूली कहासुनी के बाद दूसरे छात्र ने हाथ में पहने कड़े से उसके साथ मारपीट की।
उस मामले में भी हाथ के कड़े के इस्तेमाल को लेकर चर्चा हुई थी। अभी इस घटना के कुछ ही दिन बाद गंजमुरादाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा आठ के छात्र के सिर पर कथित तौर पर कड़े से वार किए जाने की घटना सामने आने से विद्यालयों में छात्रों के बीच मारपीट में ऐसी वस्तुओं के इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ गई है।
एक सप्ताह में दो घटनाओं से उठे सवाल
लगभग एक सप्ताह के अंतराल में सामने आईं दोनों घटनाओं ने विद्यालयों में छात्रों की निगरानी और अनुशासन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आम तौर पर हाथ में पहनने वाला कड़ा व्यक्तिगत पहनावे का हिस्सा माना जाता है, लेकिन यदि इसका इस्तेमाल मारपीट में किया जाए तो चोट गंभीर हो सकती है। यही वजह है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि विद्यालयों में छात्रों के पास ऐसी वस्तुओं को लेकर निगरानी की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रों के बीच छोटी-छोटी बातों पर विवाद होना कोई नई बात नहीं है, लेकिन विवाद के दौरान कड़े जैसी वस्तु का इस्तेमाल चिंता का विषय है। विद्यालय प्रशासन और शिक्षा विभाग को ऐसे मामलों में केवल घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय छात्रों के बीच अनुशासन, व्यवहार और आपसी विवाद को लेकर जागरूकता पर भी ध्यान देना चाहिए।
घटना के बाद अभिभावकों में चिंता
परिषदीय विद्यालय में हुई घटना की जानकारी के बाद अन्य छात्रों के अभिभावकों में भी चिंता का माहौल है। अभिभावकों का कहना है कि बच्चे पढ़ाई के लिए विद्यालय जाते हैं और वहां उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना विद्यालय प्रशासन की जिम्मेदारी है। यदि किसी छात्र के साथ मारपीट होती है तो मामले की निष्पक्ष जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि विवाद किस वजह से शुरू हुआ और घटना के समय विद्यालय के जिम्मेदार लोग कहां थे।
अभिभावकों का यह भी कहना है कि छात्रों के बीच होने वाले छोटे विवादों को शुरुआत में ही शिक्षक समझाकर शांत कराएं तो कई बार स्थिति गंभीर होने से बच सकती है। विद्यालय में अनुशासन और बच्चों के व्यवहार पर नियमित निगरानी की जरूरत है।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर भी सवाल
घटना के बाद शिक्षा विभाग ने शिक्षक से स्पष्टीकरण लेकर उचित कार्रवाई की बात कही है, लेकिन एक ही सप्ताह में क्षेत्र के दो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में हाथ के कड़े से मारपीट की शिकायत सामने आने के बाद निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हालांकि दोनों घटनाओं के कारण, परिस्थितियां और जिम्मेदार छात्रों की भूमिका अलग-अलग हो सकती है, लेकिन दोनों मामलों में एक समान बात हाथ में पहने जाने वाले कड़े का कथित तौर पर मारपीट में इस्तेमाल होना है। ऐसे में विद्यालयों में छात्रों के बीच हिंसक व्यवहार को रोकने के लिए जागरूकता और अनुशासन संबंधी उपायों पर ध्यान देना जरूरी माना जा रहा है। फिलहाल गंजमुरादाबाद के उच्च प्राथमिक विद्यालय में छात्र के घायल होने के मामले में पुलिस को दी गई तहरीर और शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्तावित जांच के बाद ही घटना की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। वहीं, घायल छात्र के उपचार के बाद परिवार मामले में कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहा है।
एक सप्ताह के भीतर सामने आए दो मामलों ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि छात्रों के बीच मामूली विवाद आखिर किस तरह गंभीर मारपीट में बदल रहे हैं और विद्यालय स्तर पर इन्हें रोकने के लिए निगरानी एवं अनुशासन की व्यवस्था को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।


