नवरात्र में माँ पथवारी के दरबार में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, दर्शन-पूजन को पहुंच रहे दूर-दराज के भक्त
असोहा के असावर गांव स्थित माँ पथवारी देवी मंदिर बना आस्था का प्रमुख केंद्र, उन्नाव समेत कई जनपदों से पहुंच रहे श्रद्धालु
पुरवा/असोहा, उन्नाव। नवरात्र के पावन अवसर पर क्षेत्र के देवी मंदिरों में श्रद्धा और भक्ति का माहौल बना हुआ है। माँ जालीपा, देहवा देवी, पूर्वी माँ, बागेश्वरी माँ, झण्डेश्वरी माँ और माँ पथवारी सहित विभिन्न मंदिरों में दर्शन-पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। विशेष रूप से असावर गांव स्थित माँ पथवारी देवी मंदिर में भक्तों की आवाजाही बढ़ गई है। मंदिर क्षेत्र ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जनपदों के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
नवरात्र में बढ़ जाती है मंदिर की रौनक
असावर गांव स्थित माँ पथवारी देवी मंदिर में वर्षभर श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्र के दौरान मंदिर परिसर में विशेष चहल-पहल देखने को मिलती है। माँ के दर्शन करने के लिए उन्नाव के अलावा कानपुर, लखनऊ, रायबरेली और हरदोई सहित आसपास के जनपदों से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। भक्त मंदिर में पूजा-अर्चना, हवन और मनौती मांगकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
माँ की महिमा को लेकर श्रद्धालुओं में गहरी आस्था
ग्रामीणों के अनुसार, मंदिर के प्राचीन इतिहास के बारे में स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है, लेकिन माँ पथवारी के प्रति लोगों की गहरी आस्था पीढ़ियों से बनी हुई है। क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि माँ दिन में तीन बार अपना स्वरूप बदलती हैं। हालाँकि, यह मान्यता स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था पर आधारित है।
प्रदीप निर्मल, शिवकुमार, सोनू मिश्र, प्रताप सिंह, दिलीप विमल, मोहम्मद शकील और रोहित शुक्ल सहित क्षेत्र के लोगों ने बताया कि मंदिर में दूर-दराज से आने वाले भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से माँ के दरबार में आने वाले भक्तों को निराश नहीं होना पड़ता।
धार्मिक आयोजनों की है विशेष परंपरा
ग्रामीणों के मुताबिक, मंदिर परिसर में वर्षभर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। पूजा-पाठ, हवन और मनौती के लिए श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और मर्यादा का विशेष ध्यान रखा जाता है।
रोहित निर्मल, प्रकाश, देवेश सिंह और अनूप शुक्ल सहित ग्रामीणों ने बताया कि मंदिर परिसर में नाच-गाने और नौटंकी जैसे कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाते। ग्रामीणों के बीच ऐसी मान्यता भी प्रचलित है कि मंदिर की परंपराओं के विपरीत आयोजन होने पर संबंधित क्षेत्र या आयोजक को विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। यह स्थानीय लोगों की धार्मिक मान्यता है।
मनौती पूरी होने पर जिह्वा अर्पित करने की भी चर्चा
ग्रामीणों ने एक घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि पड़ोसी दऊ गांव के एक युवक ने मनौती पूरी होने पर अपनी जिह्वा माँ को अर्पित कर दी थी। ग्रामीणों के अनुसार, यह घटना मंदिर की महिमा से जुड़ी लोकमान्यता के रूप में आज भी चर्चा में रहती है। हालांकि, इस घटना की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
माँ पथवारी देवी मंदिर आज भी क्षेत्रीय संस्कृति, धार्मिक परंपरा और जनआस्था का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। नवरात्र के दौरान मंदिर में पहुंच रहे श्रद्धालुओं की भीड़ इस बात का प्रमाण है कि माँ के प्रति लोगों की श्रद्धा और विश्वास वर्षों से कायम है।
संवाददाता: जनक कुमार सिंह, पुरवा, उन्नाव।


