कानपुर, 27 अगस्त 2026। रक्षाबंधन का पर्व इस बार कानपुर में भाई-बहन के प्रेम और सुरक्षा के पारंपरिक भाव से आगे बढ़कर सामाजिक जागरूकता और नशामुक्ति के संकल्प का संदेश लेकर आया। अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान की ओर से आयोजित कार्यक्रम में एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरु श्री श्री ज्योति बाबा ने देशभर में ‘नशा मुक्ति रक्षाबंधन’ अभियान का आह्वान करते हुए कहा कि राखी का धागा केवल भाई-बहन के रिश्ते की मजबूती का प्रतीक न रहे, बल्कि युवाओं को नशे की गिरफ्त से बचाने का संकल्प भी बने।
ज्योति बाबा ने कहा कि आज देश के सामने नशे की बढ़ती प्रवृत्ति एक गंभीर सामाजिक चुनौती है। युवा वर्ग को नशे से बचाने के लिए केवल कानून, कार्रवाई और प्रतिबंध पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए परिवार, समाज, शिक्षण संस्थानों और युवाओं को मिलकर एक सकारात्मक वातावरण तैयार करना होगा। उन्होंने कहा कि “नशामुक्त युवा ही विकसित भारत 2047 की वास्तविक नींव है।”
राखी के साथ लिया गया नशामुक्ति का संकल्प
कार्यक्रम में बहनों से अपील की गई कि वे इस रक्षाबंधन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांधने के साथ उनके स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त भविष्य का संकल्प भी लें। अभियान के तहत भाई-बहनों को तीन प्रमुख संकल्प दिलाए गए।
पहला—मैं स्वयं किसी भी प्रकार का नशा नहीं करूंगा।
दूसरा—मैं अपने कम से कम पांच दोस्तों को भी नशे से दूर रखने का प्रयास करूंगा।
तीसरा—मैं प्रत्येक सप्ताह दो घंटे देश और समाज की सेवा के लिए समर्पित करूंगा।
आयोजकों का कहना है कि इस तरह के संकल्प परिवार से शुरू होकर मित्रों और समाज तक सकारात्मक संदेश पहुंचा सकते हैं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से नशामुक्ति और युवा जागरूकता के लिए काम करने का संकल्प लिया।
‘रक्षा’ का अर्थ केवल व्यक्ति की नहीं, भविष्य की सुरक्षा भी
ज्योति बाबा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में रक्षा का भाव व्यापक है। रक्षाबंधन केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा का वचन देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक-दूसरे के जीवन, सम्मान, संस्कार और स्वास्थ्य की रक्षा का भी संदेश देता है।
उन्होंने कहा कि आज जब नशे का प्रभाव परिवारों और युवाओं के भविष्य को प्रभावित कर रहा है, तब राखी का पवित्र धागा एक नए सामाजिक संकल्प का माध्यम बन सकता है। उन्होंने महाभारत के प्रसंग का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय परंपरा में धागे को सदियों से रक्षा और विश्वास के प्रतीक के रूप में देखा गया है। आज उसी भावना को नशामुक्ति के अभियान से जोड़ने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यदि एक बहन अपने भाई को नशे से बचाने के लिए भावनात्मक रूप से साथ खड़ी होती है और भाई भी बहन के विश्वास को बनाए रखने का संकल्प लेता है, तो इसका प्रभाव पूरे परिवार पर पड़ सकता है।
35 वर्षों से नशामुक्ति के लिए अभियान
श्री श्री ज्योति बाबा ने बताया कि वह पिछले करीब 35 वर्षों से नशामुक्ति और परिवार जागरूकता के क्षेत्र में अभियान चला रहे हैं। उनके अनुसार इस अभियान के माध्यम से लाखों परिवारों तक नशामुक्ति का संदेश पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि नशा केवल उस व्यक्ति की समस्या नहीं है जो नशा करता है। इसका असर उसके माता-पिता, पत्नी, बच्चों, भाई-बहनों और पूरे परिवार पर पड़ता है। नशे की वजह से आर्थिक परेशानी, घरेलू तनाव, स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं और सामाजिक दूरी जैसी अनेक चुनौतियां सामने आ सकती हैं। इसलिए नशामुक्ति का समाधान भी परिवार की सक्रिय भागीदारी से ही अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
ज्योति बाबा ने कहा कि परिवार अगर समय रहते अपने बच्चों और युवाओं के व्यवहार में बदलाव को समझे, उनसे संवाद करे और उन्हें भावनात्मक सहयोग दे, तो उन्हें नशे की ओर जाने से रोकने में मदद मिल सकती है।
परिवार को बनना होगा पहली सुरक्षा दीवार
सोशल एक्टिविस्ट गीता पाल ने कहा कि नशे की समस्या से निपटने के लिए केवल कानून और प्रतिबंधों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। समाज को नशे की मांग कम करने के लिए परिवार स्तर पर काम करना होगा।
उन्होंने कहा कि परिवार में संवाद, विश्वास और भावनात्मक सहयोग मजबूत होने पर युवाओं को नकारात्मक संगति और नशे जैसी आदतों से बचाने में मदद मिल सकती है। रक्षाबंधन जैसे पर्व परिवार को एक साथ बैठकर सकारात्मक संकल्प लेने का अवसर प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि भाई की कलाई पर बांधी जाने वाली राखी यदि उसके साथ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी लेकर जाए, तो यह पर्व युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकता है।
‘बहन के आंसू की कसम, नशे को कहें अलविदा’
प्रधानाचार्य केशराज सिंह ने देश की बहनों से अपील की कि इस रक्षाबंधन भाई को महंगे उपहार के साथ-साथ एक ऐसा उपहार दें, जिसकी कीमत पूरे परिवार के भविष्य से जुड़ी है—नशामुक्त जीवन का वचन।
उन्होंने भाइयों से कहा कि वे अपनी बहनों के विश्वास और परिवार की उम्मीदों को ध्यान में रखते हुए नशे से दूरी बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि किसी भी नशे की शुरुआत अक्सर छोटी लगती है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत व्यक्ति और परिवार दोनों के लिए गंभीर समस्या बन सकती है।
उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए माता-पिता, शिक्षक और समाज के जिम्मेदार लोगों को भी अपनी भूमिका निभानी होगी।
युवाओं को जोड़ने पर जोर
‘नशा मुक्ति रक्षाबंधन’ अभियान का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य युवाओं को स्वयं जागरूक बनाना और उन्हें अपने मित्रों के बीच नशामुक्ति का संदेशवाहक बनाना है। कार्यक्रम में युवाओं से कहा गया कि वे अपने आसपास नशे की ओर बढ़ रहे साथियों को अकेला न छोड़ें, बल्कि उन्हें समझाने और जरूरत पड़ने पर परिवार तथा उचित सहायता तक पहुंचाने का प्रयास करें।
ज्योति बाबा ने कहा कि युवा यदि युवा को समझाएगा तो संदेश अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकता है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों का उपयोग भी नशामुक्ति, योग, स्वास्थ्य और सकारात्मक जीवनशैली के प्रचार के लिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी ऊर्जा को खेल, योग, शिक्षा, कौशल विकास, सामाजिक सेवा और राष्ट्र निर्माण में लगाएं।
नशामुक्त भारत के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि नशामुक्त समाज का निर्माण किसी एक संस्था या व्यक्ति के प्रयास से संभव नहीं है। इसके लिए परिवार, स्कूल-कॉलेज, सामाजिक संगठन, प्रशासन, पुलिस, स्वास्थ्य क्षेत्र और युवा संगठनों को मिलकर काम करना होगा।
नशामुक्ति के साथ-साथ युवाओं के लिए स्वस्थ मनोरंजन, खेल, योग, रोजगारपरक शिक्षा और सकारात्मक गतिविधियों के अवसर बढ़ाना भी जरूरी बताया गया। वक्ताओं ने कहा कि जब युवा को अपनी प्रतिभा दिखाने और आगे बढ़ने के अवसर मिलेंगे तो वह नकारात्मक गतिविधियों से दूरी बनाने के लिए अधिक प्रेरित होगा।
ज्योति बाबा ने कहा कि भारत की युवा शक्ति देश की सबसे बड़ी ताकत है। यदि इसी युवा शक्ति को नशे से बचाकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ा जाए तो देश की विकास यात्रा को नई गति मिल सकती है।
‘एक बहन, एक भाई और एक संकल्प’
ज्योति बाबा ने अभियान को सरल संदेश देते हुए कहा कि इसकी शुरुआत हर घर से हो सकती है। “एक बहन, एक भाई और एक संकल्प” इस अभियान की मूल भावना है।
उन्होंने कहा कि यदि देश की करोड़ों बहनें रक्षाबंधन पर अपने भाइयों के साथ नशामुक्ति का संकल्प लें और भाई उस संकल्प को जीवन में उतारने का प्रयास करें, तो यह एक बड़े सामाजिक आंदोलन का रूप ले सकता है।
उन्होंने कहा, “अगर हर घर की बहन इस रक्षाबंधन पर एक भाई को नशे से बचाने का प्रयास करे, तो आने वाले वर्षों में भारत को नशामुक्त बनाने की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है। नशामुक्त युवा ही विकसित भारत 2047 की असली नींव है।”
सामूहिक शपथ के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का संचालन राजेंद्र केसरवानी ने किया। समापन अवसर पर श्री श्री ज्योति बाबा ने उपस्थित लोगों को ‘नशामुक्त युवा–विकसित भारत’ संकल्प की शपथ दिलाई।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आचार्य ऋषिकांत शुक्ल, आचार्य बहन कुमारी शुची सिंह, कुमारी अंजली श्रीवास्तव, प्रधानमंत्री बहन कर्तिका शुक्ला, सेनापति भैया भावेश प्रताप सिंह, कुमारी श्रेया मिश्रा, सौम्या प्रजापति, आंचल सिंह, दीक्षा सिंह, राधा पाल, प्रिया पांडे, प्रेविता पटेल, आयत सहित अन्य सहयोगियों की भूमिका रही।
आयोजकों ने कहा कि रक्षाबंधन के इस अवसर पर शुरू किया गया यह अभियान केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि परिवारों और युवाओं के बीच लगातार जागरूकता पैदा करने का प्रयास है। अभियान का उद्देश्य राखी के भावनात्मक रिश्ते को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए युवाओं को नशे से दूर रहने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है।
धागे से बंधा संकल्प बने सामाजिक आंदोलन
रक्षाबंधन पर कलाई में बंधा राखी का धागा आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम और विश्वास की याद दिलाता है। ‘नशा मुक्ति रक्षाबंधन’ ने इसी परंपरा में एक नया सामाजिक संदेश जोड़ने का प्रयास किया है—रक्षा केवल रिश्ते की नहीं, जीवन और भविष्य की भी हो।
यही संदेश कार्यक्रम से देश की बहनों और भाइयों तक पहुंचाया गया कि नशे के खिलाफ लड़ाई घर से शुरू हो सकती है। यदि परिवार जागरूक होगा, युवा जिम्मेदारी उठाएंगे और समाज सहयोग करेगा, तो नशामुक्त भारत की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
जारीकर्ता:
अंतर्राष्ट्रीय नशा मुक्ति अभियान
संस्थापक: श्री श्री ज्योति बाबा, एशिया बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्डधारी योग गुरु


