पुलिसलाइन के प्राथमिक विद्यालय में अनूठा ‘वृक्ष रक्षा बंधन उत्सव’ — ‘ट्री मैन’ अनूप मिश्रा की पहल ने बच्चों में जगाई पर्यावरण संरक्षण की अलख
उन्नाव। रक्षाबंधन का पर्व आमतौर पर भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और सुरक्षा के संकल्प के रूप में मनाया जाता है, लेकिन उन्नाव में इस पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़कर एक अनूठी मिसाल पेश की गई। रिजर्व पुलिस लाइन स्थित प्राथमिक विद्यालय में रक्षाबंधन के अवसर पर ‘वृक्ष रक्षा बंधन उत्सव’ मनाया गया, जिसमें स्कूली बच्चों ने पुलिसकर्मियों के साथ पेड़-पौधों को राखी बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया।
यह अभिनव पहल पुलिस कंट्रोल रूम प्रभारी एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए सक्रिय ‘ट्री मैन’ उपनिरीक्षक अनूप मिश्रा द्वारा चलाए जा रहे वृक्ष संरक्षण अभियान के तहत की गई। कार्यक्रम में बच्चों की उत्सुकता देखते ही बनती थी। नन्हे हाथों में राखियां थीं और सामने खड़े पेड़-पौधे उनके लिए किसी भाई से कम नहीं थे। बच्चों ने पेड़ों की कलाई पर राखी बांधी और उनके संरक्षण का संकल्प लेकर रक्षाबंधन के पर्व को पर्यावरण रक्षा से जोड़ने का संदेश दिया।
पेड़ों को राखी बांधकर दिया संरक्षण का संदेश
रिजर्व पुलिस लाइन स्थित प्राथमिक विद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में उपनिरीक्षक अनूप मिश्रा के साथ उनकी पत्नी एवं सब इंस्पेक्टर रीना पाण्डेय, विद्यालय प्रभारी नुपुर श्रीवास्तव और विद्यालय के बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने विद्यालय परिसर में मौजूद पेड़-पौधों को राखियां बांधीं। इस दौरान बच्चों को बताया गया कि पेड़-पौधे केवल प्रकृति की सुंदरता बढ़ाने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि मानव जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। पेड़ हमें ऑक्सीजन देते हैं, वातावरण को संतुलित रखते हैं, गर्मी कम करने में मदद करते हैं और पक्षियों सहित अनेक जीव-जंतुओं को आश्रय प्रदान करते हैं।
उपनिरीक्षक अनूप मिश्रा ने बच्चों को समझाया कि यदि रक्षाबंधन पर हम अपने भाई-बहनों की सुरक्षा का संकल्प ले सकते हैं तो प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा का संकल्प भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने बच्चों से कहा कि जिस प्रकार राखी बांधने के बाद भाई-बहन एक-दूसरे की रक्षा का वचन देते हैं, उसी प्रकार पेड़ को राखी बांधने के बाद उसकी नियमित देखभाल करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
‘ट्री मैन’ ने बच्चों को समझाया पेड़ों का महत्व
पर्यावरण संरक्षण के प्रति लंबे समय से सक्रिय उपनिरीक्षक अनूप मिश्रा को उनके पौधरोपण एवं वृक्ष संरक्षण अभियान के कारण ‘ट्री मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। उनके अभियान का उद्देश्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि लगाए गए पौधों को संरक्षित करना और आम लोगों को पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाना भी है। कार्यक्रम में उन्होंने बच्चों के साथ संवाद करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए आज से ही प्रकृति की रक्षा करनी होगी। उन्होंने बच्चों को पेड़ लगाने के साथ-साथ उनकी नियमित देखभाल करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि एक पौधा लगाना महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है उसे बड़ा होने तक सुरक्षित रखना। यदि समाज पौधों की देखभाल को अपनी जिम्मेदारी समझ ले तो आने वाले वर्षों में पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सकता है।
बच्चों ने लिया वृक्ष रक्षा का संकल्प
वृक्ष रक्षा बंधन उत्सव के दौरान बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई। बच्चों ने पेड़-पौधों को नुकसान न पहुंचाने, उनके संरक्षण में सहयोग करने और अपने आसपास अधिक से अधिक पौधे लगाने के लिए लोगों को जागरूक करने का संकल्प लिया। बच्चों के लिए यह कार्यक्रम सामान्य रक्षाबंधन से अलग और यादगार रहा। जहां एक ओर उन्हें त्योहार की परंपरा से जोड़ा गया, वहीं दूसरी ओर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी का भाव भी विकसित किया गया।
विद्यालय परिसर में पेड़ों को राखी बांधते समय बच्चों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। कई बच्चों ने संकल्प लिया कि वे अपने घर, विद्यालय और आसपास लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करेंगे।
पुलिस दंपति ने बच्चों को बांटी मिठाई और चॉकलेट
कार्यक्रम को बच्चों के लिए और भी आकर्षक बनाने के लिए उपनिरीक्षक अनूप मिश्रा और उनकी पत्नी सब इंस्पेक्टर रीना पाण्डेय ने बच्चों को चॉकलेट और मिठाई भी वितरित की। पुलिसकर्मियों के साथ बच्चों का यह आत्मीय जुड़ाव कार्यक्रम की खास विशेषता रहा। पुलिसकर्मियों ने बच्चों से बातचीत कर उनकी पढ़ाई, रुचियों और पर्यावरण के प्रति उनके विचार भी जाने। इस दौरान बच्चों को यह संदेश दिया गया कि पुलिस और समाज के बीच संबंध केवल कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियों में भी पुलिस की महत्वपूर्ण भूमिका है।
100 से अधिक सरकारी स्कूलों तक पहुंचा अभियान
अभियान के संयोजक अनूप मिश्रा के अनुसार, वृक्ष संरक्षण की मुहिम को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। उनके मुताबिक अभियान के तहत जनपद के 100 से अधिक सरकारी विद्यालयों को जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा सोशल मीडिया के माध्यम से एक लाख से अधिक लोगों तक पर्यावरण संरक्षण का संदेश पहुंचाया जा चुका है। रक्षाबंधन के अवसर पर भी अभियान से जुड़े लोगों और आम जनमानस को व्हाट्सएप संदेशों के माध्यम से अपील की जा रही है कि वे इस पर्व को केवल भाई-बहन के रिश्ते तक सीमित न रखते हुए इसे ‘पर्यावरण रक्षा उत्सव’ के रूप में भी मनाएं।
अभियान के माध्यम से लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने आसपास मौजूद पेड़-पौधों को राखी बांधें, उनकी सुरक्षा का संकल्प लें और पौधरोपण के साथ उनके संरक्षण की जिम्मेदारी भी निभाएं।
एक लाख से अधिक पौधों के पौधरोपण का दावा
अनूप मिश्रा की पहचान पर्यावरण संरक्षण और पौधरोपण से जुड़े अभियानों में सक्रिय पुलिसकर्मी के रूप में बनी है। अभियान से जुड़े विवरण के अनुसार, वह अब तक एक लाख से अधिक पौधे लगाने की मुहिम से जुड़े रहे हैं। उनका मानना है कि पर्यावरण संरक्षण केवल किसी एक विभाग या संगठन की जिम्मेदारी नहीं है। जब तक आम नागरिक इसमें सहभागी नहीं बनेगा, तब तक व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण संभव नहीं है। इसी सोच के साथ वह विद्यालयों, बच्चों और आम लोगों को अभियान से जोड़ने का प्रयास कर रहे हैं।
रक्षाबंधन को पर्यावरण से जोड़ने की अनोखी पहल
रक्षाबंधन को वृक्ष संरक्षण से जोड़ने का विचार कार्यक्रम की सबसे खास बात रही। सामान्यतः इस दिन बहनें भाइयों की कलाई पर राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती हैं। वहीं इस आयोजन में पेड़ों को राखी बांधकर यह संदेश दिया गया कि प्रकृति भी हमारी सुरक्षा करती है और इसलिए उसकी रक्षा करना हमारा दायित्व है। पेड़ हमारे जीवन की अनिवार्य जरूरतों में शामिल हैं। स्वच्छ हवा, छाया, वर्षा चक्र, मिट्टी का संरक्षण और जैव विविधता जैसे अनेक पहलू वृक्षों से सीधे जुड़े हैं। ऐसे में यदि समाज वृक्षों को केवल लगाने तक सीमित न रखकर उनकी सुरक्षा को भी अपनी जिम्मेदारी बनाए, तो पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
बच्चों के माध्यम से घर-घर पहुंचेगा पर्यावरण का संदेश
कार्यक्रम में बच्चों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया। विशेषज्ञों के अनुसार भी बच्चों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश परिवार और समाज तक आसानी से पहुंचाया जा सकता है। विद्यालय में यदि बच्चों को छोटी उम्र से ही प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाया जाए तो भविष्य में वे जिम्मेदार नागरिक के रूप में पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वृक्ष रक्षा बंधन उत्सव इसी दिशा में एक प्रयास के रूप में सामने आया। बच्चों ने पेड़ों को राखी बांधकर जो संदेश दिया, वह केवल एक दिन के आयोजन तक सीमित न रहकर नियमित वृक्ष संरक्षण की प्रेरणा बन सकता है।
पुलिस की सामाजिक भूमिका का भी संदेश
इस आयोजन ने पुलिस की सामाजिक भूमिका का एक अलग पक्ष भी सामने रखा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ पुलिसकर्मी समाज में जागरूकता फैलाने और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अभियानों में भागीदारी निभा सकते हैं, इसका उदाहरण भी कार्यक्रम के माध्यम से देखने को मिला। उपनिरीक्षक अनूप मिश्रा और सब इंस्पेक्टर रीना पाण्डेय की मौजूदगी ने बच्चों में उत्साह बढ़ाया। पुलिसकर्मियों ने बच्चों के साथ सहज वातावरण में पर्यावरण संरक्षण की बात की और उन्हें प्रकृति के प्रति जिम्मेदार बनने के लिए प्रेरित किया।
‘एक पौधा लगाएं और उसकी रक्षा करें’ का संदेश
कार्यक्रम का मूल संदेश स्पष्ट था—सिर्फ पौधा लगाना पर्याप्त नहीं, उसकी रक्षा और देखभाल भी जरूरी है। एक पौधा जब तक बड़ा होकर वृक्ष नहीं बन जाता, तब तक उसे पानी, सुरक्षा और नियमित देखभाल की जरूरत होती है। इसी सोच को रक्षाबंधन के प्रतीक से जोड़ते हुए बच्चों ने पेड़ों को राखी बांधी। इस पहल ने त्योहार की भावना को प्रकृति संरक्षण के साथ जोड़ दिया।
विद्यालय प्रभारी नुपुर श्रीवास्तव और विद्यालय के बच्चों ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता की। विद्यालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण की व्यवहारिक सीख दी।
‘ट्री मैन’ की मुहिम को मिला नया संदेश
उन्नाव में चल रही वृक्ष संरक्षण मुहिम को रक्षाबंधन के माध्यम से एक नया सामाजिक संदेश मिला है। ‘ट्री मैन’ अनूप मिश्रा की पहल का उद्देश्य यदि लोगों को पौधरोपण के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए प्रेरित करना है, तो वृक्ष रक्षा बंधन जैसा कार्यक्रम इस संदेश को भावनात्मक रूप से लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। राखी के धागे से पेड़ को बांधा गया यह प्रतीकात्मक रिश्ता वास्तव में मनुष्य और प्रकृति के बीच जिम्मेदारी का रिश्ता मजबूत करने का संदेश देता है।
कार्यक्रम के अंत में सभी ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मिलकर काम करने और अधिक से अधिक लोगों को वृक्षों की रक्षा के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। बच्चों के हाथों पेड़ों पर बंधी राखियां इस बात की गवाह बनीं कि यदि पर्यावरण संरक्षण की शुरुआत बचपन से हो, तो आने वाली पीढ़ियां प्रकृति के साथ बेहतर संतुलन स्थापित कर सकती हैं।
उन्नाव की पुलिसलाइन में मनाया गया यह वृक्ष रक्षा बंधन उत्सव इसलिए भी खास रहा क्योंकि यहां राखी सिर्फ कलाई पर नहीं, बल्कि पेड़ों पर भी बंधी—और उसके साथ लिया गया संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए हरियाली बचाने का संदेश बन गया।



