मनिकापुर में पौधारोपण के साथ पर्यावरण संरक्षण का संकल्प, ‘वृक्ष जल कथा’ ने दिया पेड़ और पानी बचाने का संदेश
बरगद बचाओ महाअभियान के बढ़ते कदमों के बीच मंदिर परिसर में जुटे पर्यावरण प्रेमी और ग्रामीण
उन्नाव। धरती को हरा-भरा रखने, पर्यावरण संतुलन बनाए रखने और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की मुहिम में उन्नाव से एक प्रेरणादायक संदेश सामने आया है। भगवंतनगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम मनिकापुर स्थित मां वनखंडी देवी एवं शिव मंदिर धाम परिसर में पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से वृहद पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जहां बड़ी संख्या में लोगों ने पौधारोपण कर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लिया, वहीं पर्यावरण के क्षेत्र में लगातार सक्रिय भूमिका निभाने वाले दो व्यक्तित्वों को सम्मानित कर उनके प्रयासों को प्रोत्साहित किया गया।
मंदिर समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ उप निरीक्षक, पुलिस कंट्रोल रूम उन्नाव प्रभारी एवं ‘ट्री मैन’ के नाम से लोकप्रिय पर्यावरण प्रेमी अनूप मिश्र ‘अपूर्व’ तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय रामपुर गढ़ोंवा के सहायक अध्यापक एवं समाजसेवी डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा को उनके पर्यावरण संरक्षण संबंधी योगदान के लिए ‘पर्यावरण प्रहरी वृक्ष मित्र सम्मान’ से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह ने कार्यक्रम को एक अलग पहचान दी और मौजूद लोगों के बीच पर्यावरण संरक्षण को लेकर उत्साह और जागरूकता दिखाई दी।
पौधारोपण से आगे बढ़कर पौधों को बचाने की जरूरत
कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण के महत्व पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में सिर्फ पौधारोपण के आंकड़े बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। वास्तविक पर्यावरण संरक्षण तब होगा, जब लगाए गए पौधों को नियमित पानी, सुरक्षा और देखभाल देकर उन्हें वृक्ष बनने तक सुरक्षित रखा जाए।
अनूप मिश्र ‘अपूर्व’, जिन्हें पर्यावरण के प्रति उनकी सक्रियता और वृक्ष संरक्षण के प्रयासों के चलते ‘ट्री मैन’ के नाम से जाना जाता है, ने अपनी चर्चित ‘वृक्ष जल कथा’ के माध्यम से उपस्थित लोगों को पेड़ और पानी के बीच के गहरे संबंध को समझाया। उन्होंने कहा कि वृक्ष हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। पेड़ वातावरण को शुद्ध करने के साथ-साथ जल संरक्षण, वर्षा चक्र और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस तरह मनुष्य अपने परिवार की देखभाल करता है, उसी तरह पौधे लगाने के बाद उनकी भी देखभाल करना समाज की जिम्मेदारी है। यदि पौधा लगाकर उसे छोड़ दिया जाए तो पौधारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कम से कम एक पौधा लगाए और उसे वृक्ष बनने तक संरक्षित करने का संकल्प ले। उन्होंने ‘बरगद बचाओ महाअभियान’ के उद्देश्यों की जानकारी देते हुए कहा कि बरगद जैसे विशाल और उपयोगी वृक्षों को बचाना केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को सुरक्षित रखने का भी प्रयास है।
बरगद केवल वृक्ष नहीं, भारतीय परंपरा और पर्यावरण की पहचान
कार्यक्रम में डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने बरगद के औषधीय, पर्यावरणीय और सामाजिक महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में बरगद को सदियों से विशेष सम्मान प्राप्त है और इसे देववृक्ष के रूप में पूजा जाता रहा है।
उन्होंने कहा कि बरगद की विशाल छाया राहगीरों, ग्रामीणों और जीव-जंतुओं को आश्रय देती है। इसका फैलाव और लंबी आयु इसे प्रकृति के महत्वपूर्ण वृक्षों में शामिल करती है। ऐसे वृक्षों का संरक्षण केवल किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि अनूप मिश्र द्वारा शुरू किया गया ‘बरगद बचाओ महाअभियान’ अब जनभागीदारी की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इस अभियान के माध्यम से लोगों में बरगद के संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि यदि गांवों में स्थानीय स्तर पर लोग वृक्षों की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने लगें तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव संभव है।
सम्मान ने बढ़ाया पर्यावरण संरक्षण का उत्साह
मंदिर समिति द्वारा अनूप मिश्र और डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा को ‘पर्यावरण प्रहरी वृक्ष मित्र सम्मान’ प्रदान किए जाने से कार्यक्रम में मौजूद लोगों में विशेष उत्साह दिखाई दिया। सम्मानित व्यक्तियों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
समिति की ओर से कहा गया कि समाज में ऐसे लोगों को सामने लाना और सम्मानित करना आवश्यक है, जो बिना किसी स्वार्थ के प्रकृति और समाज के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इससे दूसरे लोगों को भी प्रेरणा मिलती है और सामाजिक अभियानों को मजबूती मिलती है।
पौधे लगाने के साथ उनकी सुरक्षा का भी संकल्प
वृहद पौधारोपण कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर में विभिन्न पौधे लगाए गए। इस दौरान उपस्थित लोगों ने पौधों की सुरक्षा और नियमित देखभाल करने का संकल्प लिया। लोगों ने माना कि पौधारोपण तभी सार्थक होगा, जब पौधे सुरक्षित रहेंगे और भविष्य में बड़े वृक्ष का रूप लेकर समाज को छाया, ऑक्सीजन और पर्यावरणीय सुरक्षा प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने जल संकट, बढ़ते तापमान और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों के बीच वृक्षों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि आज लगाए गए पौधों का लाभ आने वाली पीढ़ियों को मिलेगा। इसलिए वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह भविष्य के लिए हरियाली और स्वच्छ पर्यावरण की नींव मजबूत करे।
ग्रामीणों की सहभागिता ने अभियान को दी नई ताकत
कार्यक्रम में ग्रामीणों, समाजसेवियों और पर्यावरण प्रेमियों की सहभागिता ने यह संदेश दिया कि पर्यावरण संरक्षण केवल शहरों तक सीमित विषय नहीं है। गांवों में भी लोग प्रकृति और पेड़ों के महत्व को समझते हुए संरक्षण की दिशा में आगे आ रहे हैं।
कार्यक्रम में मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष जयकरन सिंह, पूर्व सैनिक राजेश सिंह, भारत सिंह, शिवहर्ष सिंह, रज्जन शुक्ला, अनुराग द्विवेदी, आशीष त्रिवेदी, सुशील सिंह, राहुल त्रिवेदी, बबलू लोधी, अंकित पांडेय, सरजू प्रसाद सहित अनेक ग्रामीण एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन आशीष अवस्थी ‘मुन्ना’ ने किया। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार जताया।
अंत में मंदिर समिति के अध्यक्ष शरदेंदु कुमार मिश्र ‘सोनी’ ने सभी अतिथियों, सम्मानित व्यक्तियों, ग्रामीणों और सहभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के ऐसे कार्यक्रम लगातार आयोजित किए जाने चाहिए, ताकि समाज में पेड़ लगाने और उन्हें बचाने की संस्कृति मजबूत हो सके।
‘बरगद बचाओ’ से ‘हरियाली बचाओ’ तक पहुंचे अभियान
मनिकापुर के मंदिर परिसर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने समाज को एक व्यापक संदेश दिया—प्रकृति की रक्षा के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।
बरगद बचाओ महाअभियान के माध्यम से उठाई गई आवाज यदि गांव-गांव तक पहुंचती है और लोग पौधारोपण के साथ पौधों की सुरक्षा को अपनी जिम्मेदारी मानते हैं, तो यह अभियान पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
पेड़ लगाना आज का संकल्प है, लेकिन उसे वृक्ष बनाना आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। मनिकापुर से उठी पर्यावरण संरक्षण की यह आवाज इसी जिम्मेदारी को जनआंदोलन में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



