नई दिल्ली। भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन शुक्रवार, 28 अगस्त को देशभर में मनाया जाएगा। त्योहार की तैयारियों के बीच बाजारों में जहां राखियों, मिठाइयों और उपहारों की खरीदारी को लेकर उत्साह दिखाई दे रहा है, वहीं बढ़ती कीमतों ने आम परिवारों का बजट भी बिगाड़ दिया है। इस बार रक्षाबंधन पर लोगों को परंपरा निभाने के साथ-साथ जेब का हिसाब भी रखना पड़ रहा है।
महंगाई का असर सबसे ज्यादा त्योहार से जुड़ी रोजमर्रा की खरीदारी पर दिखाई दे रहा है। देश में जुलाई 2026 की खुदरा महंगाई दर 4.45 प्रतिशत रही, जबकि खाद्य महंगाई 5.52 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्र में खाद्य महंगाई 5.79 प्रतिशत और शहरी क्षेत्र में 5.05 प्रतिशत रही। ऐसे में रक्षाबंधन जैसे पारिवारिक त्योहार पर मिठाई, फल, सूखे मेवे और अन्य खाद्य सामग्री की बढ़ी लागत सीधे घरेलू बजट को प्रभावित कर रही है।
राखी बाजार में रौनक, कीमतों में भी इजाफा
रक्षाबंधन से पहले देश के अलग-अलग शहरों में राखी बाजार सज गए हैं। पारंपरिक राखियों के साथ डिजाइनर, बच्चों की पसंद वाली और आधुनिक राखियों की मांग दिखाई दे रही है। प्रयागराज के बाजारों में इस वर्ष राखियों की कीमतों में पिछले साल की तुलना में करीब 10 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि की रिपोर्ट सामने आई है। इसके बावजूद खरीदारी को लेकर लोगों का उत्साह बना हुआ है।
बाजार में एक तरफ महंगी डिजाइनर राखियां आकर्षण का केंद्र हैं तो दूसरी तरफ आम परिवार बजट के अनुरूप साधारण लेकिन आकर्षक राखियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। दुकानदारों के लिए भी यह त्योहार बिक्री बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।
मिठाई की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
रक्षाबंधन पर मिठाई की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन इस बार मिठाई बनाने वाली सामग्री की कीमतों में बढ़ोतरी ने कारोबारियों और ग्राहकों दोनों की चिंता बढ़ाई है।
लखनऊ के मिठाई बाजार में चीनी की कीमत बढ़ने का असर दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक चीनी का भाव करीब ₹45 प्रति किलो से बढ़कर ₹66-70 प्रति किलो तक पहुंच गया है। मिठाइयों की सजावट में इस्तेमाल होने वाली चांदी की वर्क की कीमत में भी उल्लेखनीय वृद्धि बताई गई है। कुछ दुकानदारों ने बढ़ी लागत के बावजूद कीमतें तत्काल नहीं बढ़ाने का फैसला किया है, जबकि कुछ दुकानों पर मिठाइयों के दाम बढ़ाए गए हैं।
यानी इस रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधना तो आसान है, लेकिन उसके बाद मिठाई का डिब्बा खरीदते समय जेब का हिसाब लगाना जरूरी हो गया है।
चीनी की बढ़ती कीमत ने बढ़ाई मुश्किल
त्योहारों के मौसम में चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। इसी बीच चीनी की उपलब्धता और कीमतों को लेकर बाजार में दबाव की खबरें सामने आई हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ बड़े खुदरा विक्रेताओं और ऑनलाइन किराना प्लेटफॉर्म ने खरीद की सीमा तक लगाई, जबकि चीनी की कीमत में करीब 29 प्रतिशत की वृद्धि बताई गई।
इसका असर मिठाई, घर में बनने वाले पकवान और त्योहार से जुड़ी खाद्य तैयारियों पर पड़ना स्वाभाविक है।
महंगाई के बीच भी रिश्तों की मिठास कायम
हालांकि कीमतों में बढ़ोतरी ने परिवारों का बजट प्रभावित किया है, लेकिन रक्षाबंधन के भावनात्मक महत्व पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा। बहनें अपने भाइयों के लिए राखी खरीद रही हैं और भाई भी बहनों को उपहार देने की तैयारी में जुटे हैं।
कई परिवार महंगे उपहारों के बजाय उपयोगी और बजट-अनुकूल विकल्प चुन रहे हैं। कुछ लोग महंगे बाजारू उपहारों की जगह कपड़े, किताबें, पौधे या अपनी क्षमता के अनुसार नकद राशि देना पसंद कर रहे हैं। संदेश साफ है—रिश्ते की कीमत बाजार तय नहीं करता।
इस बार 'महंगी राखी' से ज्यादा जरूरी 'सच्चा साथ'
रक्षाबंधन का मूल भाव किसी महंगे उपहार या शानदार मिठाई में नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच प्रेम और विश्वास में है। महंगाई के दौर में यह संदेश और महत्वपूर्ण हो जाता है कि त्योहार मनाने के लिए अनावश्यक खर्च या दिखावे का दबाव परिवारों पर नहीं होना चाहिए।
एक साधारण राखी, घर की बनी मिठाई और परिवार के साथ बिताए कुछ पल भी रक्षाबंधन को यादगार बना सकते हैं। महंगे उपहार की जगह बहन की जरूरत के अनुसार कोई उपयोगी वस्तु देना या उसके भविष्य के लिए बचत/निवेश करना भी रिश्ते को मजबूत करने वाला विकल्प हो सकता है।
छोटे दुकानदारों के लिए भी बड़ा त्योहार
रक्षाबंधन केवल पारिवारिक उत्सव नहीं, बल्कि छोटे कारोबारियों के लिए भी महत्वपूर्ण कारोबारी अवसर है। राखी विक्रेता, मिठाई दुकानदार, फूल विक्रेता, गिफ्ट शॉप, पैकेजिंग कारोबारी और घरेलू स्तर पर राखी बनाने वाले कारीगर इस त्योहार से आय की उम्मीद रखते हैं।
महंगाई के बावजूद यदि उपभोक्ता स्थानीय बाजार से खरीदारी करते हैं तो इसका सीधा लाभ छोटे कारोबारियों और कारीगरों तक पहुंचता है। स्थानीय और हस्तनिर्मित राखियों की खरीद से घरेलू उद्यमों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
महंगाई ने बदली खरीदारी की रणनीति
इस बार परिवारों में त्योहार की खरीदारी को लेकर एक नया रुझान दिखाई दे रहा है—कम खर्च में ज्यादा भावनात्मक मूल्य। लोग पहले से बजट तय कर रहे हैं, ऑनलाइन और स्थानीय बाजार की कीमतों की तुलना कर रहे हैं तथा जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी कर रहे हैं।
कई परिवार बाहर से महंगी मिठाई खरीदने के बजाय घर पर मिठाई या पकवान बनाने का विकल्प भी चुन रहे हैं। इससे खर्च कम करने के साथ परिवार के सदस्यों को साथ समय बिताने का अवसर भी मिलता है।
रक्षाबंधन का नया संदेश: सुरक्षा के साथ आर्थिक समझदारी
आज रक्षाबंधन को केवल भाई द्वारा बहन की रक्षा के पारंपरिक संकल्प तक सीमित रखने के बजाय आर्थिक सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से भी जोड़ा जा सकता है। बहन को महंगा उपहार देने के बजाय उसके नाम छोटी बचत, निवेश, बीमा या शिक्षा से जुड़ा सहयोग भविष्य में अधिक उपयोगी साबित हो सकता है।
इस तरह बदलते समय में राखी का अर्थ भी व्यापक हो रहा है—सुरक्षा केवल शारीरिक नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा भी है।
महंगाई के बीच त्योहार की असली मिठास
रक्षाबंधन पर बाजार की कीमतें भले बढ़ गई हों, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की कीमत किसी बाजार में तय नहीं होती। महंगाई परिवारों को खर्च में सावधानी बरतने के लिए मजबूर कर सकती है, लेकिन प्रेम, विश्वास और अपनत्व पर इसका असर नहीं पड़ना चाहिए।
इस बार रक्षाबंधन का सबसे बड़ा संदेश यही हो सकता है कि महंगाई चाहे जितनी बढ़े, रिश्तों में मिठास कम नहीं होनी चाहिए। महंगे उपहारों के बजाय समय, सम्मान, सहयोग और भरोसा दिया जाए तो राखी का धागा पहले से कहीं अधिक मजबूत हो सकता है।
राखी की कलाई सजे, मिठाई की मिठास बनी रहे और परिवार का बजट भी न बिगड़े—यही महंगाई के दौर में खुशहाल रक्षाबंधन की सबसे सुंदर तस्वीर है।


