लगातार बारिश ने खोली निर्माण और जलनिकासी व्यवस्था की पोल, पांच किलोमीटर में 12 स्थानों पर मिट्टी बहने की रिपोर्ट
उन्नाव। कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर बारिश के बाद सड़क और उसके किनारों की स्थिति लगातार चिंता बढ़ा रही है। एक्सप्रेसवे के अलग-अलग हिस्सों में मरम्मत का काम जारी रहने के बावजूद नई जगहों पर सड़क के किनारे मिट्टी बहने और धंसने की घटनाएं सामने आ रही हैं। शनिवार को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक अचलगंज क्षेत्र में कोरारी टोल से आजाद मार्ग के बीच करीब पांच किलोमीटर के हिस्से में 12 स्थानों पर सड़क की मिट्टी बह गई, जिसके बाद स्थिति संभालने के लिए पोकलैंड मशीनों की मदद ली जा रही है।
इससे पहले भी एक्सप्रेसवे के कई हिस्सों में सड़क धंसने, पैचवर्क उखड़ने और जलभराव की समस्याएं सामने आती रही हैं। यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल सड़क की तत्काल मरम्मत से आगे बढ़कर उसकी स्थायी मजबूती और जलनिकासी व्यवस्था को लेकर खड़ा हो रहा है।
46 दिन से मरम्मत, फिर भी समस्या बरकरार
29 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार एक्सप्रेसवे पर मरम्मत का सिलसिला करीब 46 दिनों से जारी है। स्थिति यह है कि एक स्थान पर मरम्मत पूरी होने के बाद दूसरे स्थान पर सड़क अथवा उसके किनारे क्षतिग्रस्त होने की सूचना सामने आ रही है।
बारिश के दौरान सड़क के आसपास पानी का दबाव बढ़ने से मिट्टी के कटाव की समस्या और गंभीर हो जाती है। ऐसे में केवल ऊपर से पैचवर्क करना पर्याप्त नहीं माना जा सकता। सड़क के नीचे की परत, मिट्टी की मजबूती, ढलान और पानी की निकासी—इन सभी पहलुओं की तकनीकी जांच जरूरी हो जाती है।
10 फीट गहरा गड्ढा भी सामने आया
26 अगस्त को अचलगंज/असोहा क्षेत्र में आजाद मार्ग टोल प्लाजा से आगे आटा बंथर-लक्ष्मणखेड़ा मार्ग के अंडरपास के किनारे स्लोप की मिट्टी धंसने से करीब पांच फीट चौड़ा और 10 फीट गहरा गड्ढा बनने की रिपोर्ट सामने आई थी। इसके कारण सड़क के प्रभावित होने और आवागमन करने वाले वाहनों के लिए खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई। इसी क्षेत्र में बारिश के बाद कई स्थानों पर सड़क पर पहियों के निशान जैसी गहरी नालियां बनने की बात भी सामने आई।
यह स्थिति बताती है कि समस्या केवल सड़क की ऊपरी सतह तक सीमित नहीं है। सड़क के किनारे की मिट्टी और ढलान का स्थायित्व भी महत्वपूर्ण चुनौती बन गया है।
पहले भी कई जगह धंस चुकी है सड़क
अगस्त के शुरुआती दिनों में कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर सड़क धंसने की घटनाएं सामने आई थीं। 11 अगस्त की रिपोर्ट में 24 घंटे के भीतर चार और स्थानों पर सड़क के प्रभावित होने की बात कही गई थी। इससे पहले भी कई स्थानों पर सड़क धंसने और मरम्मत की घटनाएं दर्ज की गई थीं।
10 अगस्त की रिपोर्ट में एक्सप्रेसवे पर कई स्थानों पर जलभराव और सड़क धंसने की समस्या का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में पानी की निकासी के ठोस इंतजाम को लेकर भी सवाल उठाए गए थे।
विशेषज्ञों ने भी शुरू की तकनीकी जांच
लगातार सामने आ रही समस्याओं के बाद एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता की तकनीकी जांच भी शुरू की गई। एनएचएआई की ओर से जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम ने सड़क और मिट्टी के नमूने लिए। इसके अलावा आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर केएस रेड्डी के नेतृत्व में पेवमेंट विशेषज्ञों की टीम ने भी एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। जांच का उद्देश्य सड़क के धंसने के कारणों का पता लगाना और सुधार के उपाय सुझाना बताया गया।
ऐसे में अब लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। यदि समस्या का मूल कारण केवल बारिश नहीं बल्कि निर्माण, मिट्टी की गुणवत्ता, जलनिकासी या सड़क की संरचना से जुड़ा पाया जाता है, तो स्थायी समाधान के लिए व्यापक स्तर पर काम करना पड़ सकता है।
गंगा एक्सप्रेसवे भी बारिश से अछूता नहीं
उन्नाव में समस्या केवल कानपुर-लखनऊ एक्सप्रेसवे तक सीमित नहीं है। गंगा एक्सप्रेसवे के उन्नाव क्षेत्र में भी बारिश के बाद सड़क में दरार और अन्य खामियां सामने आने की रिपोर्टें आई हैं।
17 अगस्त को किलोमीटर 421 और 422 के बीच सड़क में दरार आने की सूचना मिली थी। इसके बाद कार्यदायी संस्था ने मरम्मत शुरू कराई।
21 अगस्त को बशीरतगंज के पास करीब चार मीटर हिस्से में सड़क में दरार आने की खबर सामने आई। अधिकारियों के अनुसार बारिश के दौरान कुछ स्थानों पर आई खामियों को ठीक कराया गया और यातायात सामान्य बताया गया।
27 अगस्त को भी गंगा एक्सप्रेसवे पर पहले किए गए पैचवर्क में दोबारा दरार दिखाई देने की रिपोर्ट सामने आई, जिससे सड़क की मजबूती और निर्माण गुणवत्ता को लेकर सवाल उठे।
यात्रियों की सुरक्षा सबसे बड़ा सवाल
एक्सप्रेसवे का उद्देश्य तेज, सुरक्षित और सुगम यातायात उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि बारिश के बाद बार-बार सड़क धंसने, मिट्टी बहने, दरार आने या जलभराव की स्थिति बनती है तो सबसे बड़ा खतरा यात्रियों की सुरक्षा को होता है।
तेज गति से चलने वाले वाहनों के लिए सड़क के अचानक धंसने या किनारे की मिट्टी कमजोर होने की स्थिति गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। इसलिए प्रभावित स्थानों पर केवल मरम्मत करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि जब तक स्थायी समाधान नहीं होता तब तक पर्याप्त चेतावनी संकेत, बैरिकेडिंग और गति नियंत्रण की व्यवस्था भी जरूरी है।
अब चाहिए स्थायी समाधान
उन्नाव के इन एक्सप्रेसवे पर लगातार सामने आ रही समस्याओं ने एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा कर दिया है—क्या हर बारिश के बाद होने वाली मरम्मत को ही समाधान माना जाएगा या समस्या की जड़ तक पहुंचकर स्थायी सुधार किया जाएगा?
विशेषज्ञों की तकनीकी जांच के बाद यह स्पष्ट होना चाहिए कि सड़क के किन हिस्सों में मिट्टी की कमजोरी है, कहां जलनिकासी अपर्याप्त है और किन स्थानों पर सड़क की संरचनात्मक मजबूती बढ़ाने की जरूरत है।
ग्रामीण दृष्टि की मांग है कि संबंधित एजेंसियां जांच रिपोर्ट के प्रमुख तथ्यों को सार्वजनिक करें और जहां भी तकनीकी कमी पाई जाए, वहां जिम्मेदारी तय करते हुए स्थायी सुधार कराया जाए।
बारिश हर साल होगी। पानी का दबाव भी रहेगा। लेकिन करोड़ों रुपये की लागत से बने एक्सप्रेसवे को हर बारिश के बाद मरम्मत की जरूरत पड़े, तो यह केवल सड़क का नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था की गुणवत्ता का सवाल बन जाता है।
अब उन्नाव की जनता जानना चाहती है—बार-बार धंस रही सड़क का स्थायी इलाज कब होगा?


