पाठकपुर समेत कई गांवों में एक सप्ताह से बढ़ा बंदरों का आतंक, दो महिलाओं को बनाया शिकार; ग्रामीणों ने बीडीओ व एसडीएम से लगाई गुहार
असोहा, उन्नाव। विकासखंड असोहा क्षेत्र के कई गांवों में पिछले करीब एक सप्ताह से कटखने बंदरों के आतंक ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। काथा, पाठकपुर, कंदरपुर, सरैया, बाबूरहा, असोहा, नीमैचा और अजयपुर समेत आसपास के गांवों में बंदरों के झुंड लोगों को दौड़ाकर काट रहे हैं। स्थिति यह है कि ग्रामीणों में घर से बाहर निकलने को लेकर भय का माहौल है। ग्रामीणों का आरोप है कि बंदर घरों में घुसकर भी लोगों पर हमला कर रहे हैं।
घर में काम कर रही महिला और बाजार जा रही युवती को काटा
मंगलवार को पाठकपुर गांव में बंदरों के हमले की दो घटनाएं सामने आईं। गांव निवासी लक्ष्मी देवी घर में काम कर रही थीं, तभी एक कटखना बंदर वहां पहुंच गया और उन पर हमला कर दिया। बंदर के काटने से वह घायल हो गईं।
वहीं, बबली दुकान से सामान लेने जा रही थीं। इसी दौरान बंदर ने उन्हें दौड़ा लिया और काटकर घायल कर दिया। दोनों घटनाओं के बाद परिजन घायलों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया, जिसके बाद दोनों को छुट्टी दे दी गई।
इन घटनाओं के बाद गांव में बंदरों को लेकर दहशत और बढ़ गई है। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों के अचानक हमले के कारण लोग अकेले घर से बाहर निकलने से भी बच रहे हैं।
15 दिनों में दर्जनों ग्रामीण हुए बंदरों के हमले का शिकार
ग्रामीणों के अनुसार, क्षेत्र में पिछले करीब 15 दिनों से बंदरों का आतंक लगातार बढ़ रहा है। इस दौरान सुधीर कुमार, गौरव त्रिपाठी, शंकरी, छबीनाथ, संतोष त्रिपाठी, महादीन, छेद्दू प्रकाश, राजकुमार, सरोज और कन्हैया समेत दर्जनों ग्रामीण बंदरों के हमले का शिकार हो चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बंदरों का व्यवहार सामान्य नहीं है। वे लोगों को देखते ही उनकी ओर दौड़ पड़ते हैं और कई बार पीछा करते हुए घरों तक पहुंच जाते हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
घरों में घुसकर सामान भी उठा ले जाते हैं बंदर
ग्रामीणों के मुताबिक बंदरों के झुंड केवल सड़क और गलियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि घरों में भी घुस जाते हैं। बंदरों के अचानक घर में पहुंचने से लोग घबरा जाते हैं। कई ग्रामीणों को डर है कि यदि बंदरों का आतंक इसी तरह बढ़ता रहा तो किसी दिन बड़ी घटना हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि बंदरों को पकड़ने के लिए संबंधित विभाग की टीम भेजी जाए और समस्या का स्थायी समाधान कराया जाए।
थाना दिवस में भी ग्रामीणों ने उठाया था मुद्दा
बंदरों के आतंक से परेशान ग्रामीणों ने समस्या को लेकर प्रशासन से लगातार गुहार लगाई है। ग्रामीण राजेश अग्निहोत्री, नीरज त्रिपाठी, आलोक दुबे, भोलू और योगेश समेत अन्य लोगों ने बीते शनिवार को थाना दिवस में उप जिलाधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर बंदरों से निजात दिलाने की मांग की थी। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत के बावजूद समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। इसके बाद मंगलवार को ग्रामीणों ने एक बार फिर अधिकारियों का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया।
बीडीओ को सौंपा प्रार्थना पत्र
मंगलवार को सतीश अग्निहोत्री, अनुज कुमार, अंशु अवस्थी, सूरज समेत अन्य ग्रामीणों ने खंड विकास अधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर बंदरों को पकड़वाने और गांवों को उनके आतंक से निजात दिलाने की मांग की। ग्रामीणों ने अधिकारियों से अपील की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभाग को निर्देशित किया जाए, ताकि बंदरों को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके और ग्रामीणों को लगातार हो रहे हमलों से राहत मिल सके।
बच्चों और बुजुर्गों को लेकर बढ़ी चिंता
बंदरों के लगातार हमलों के कारण ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि बच्चे अक्सर घर के बाहर खेलते हैं और बुजुर्ग भी जरूरी काम से अकेले बाहर निकलते हैं। ऐसे में बंदरों के अचानक हमले से गंभीर चोट लगने की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि किसी अप्रिय घटना का इंतजार करने के बजाय तत्काल बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई की जाए।
प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद
क्षेत्र के कई गांवों में बंदरों के आतंक की शिकायतें सामने आने के बाद ग्रामीण अब प्रशासन से ठोस कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते बंदरों को नहीं पकड़ा गया तो आने वाले दिनों में समस्या और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित विभाग की टीम गांवों में भेजकर बंदरों को पकड़े और समस्या का स्थायी समाधान सुनिश्चित करे। लगातार हो रहे हमलों के बीच अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।


