पूर्वजों की जड़ों की तलाश में उन्नाव पहुंचे बृजभूषण शरण सिंह, बोले— राजनीति नहीं, अपनी जन्मभूमि से जुड़ने आया हूं
1857 के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा बताया पूर्वजों का इतिहास, पुरवा तहसील के रंजीत पूर्वा गांव से गोंडा जाने का किया जिक्र; मां पूर्वी देवी मंदिर में दर्शन-पूजन कर स्थानीय लोगों से की मुलाकात
पुरवा/असोहा, उन्नाव। अपने पूर्वजों की जन्मभूमि और पारिवारिक जड़ों की तलाश में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह गुरुवार को उन्नाव पहुंचे। असोहा क्षेत्र स्थित आदि शक्ति पीठ मां पूर्वी देवी मंदिर में दर्शन-पूजन के बाद उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद किया और पुरवा तहसील से अपने परिवार के पुराने संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनका यहां आने का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि अपने पूर्वजों की जन्मभूमि से जुड़ना और परिवार की पुरानी स्मृतियों को फिर से जीवंत करना है।
मंदिर पहुंचने पर कार्यक्रम आयोजक सतीश त्रिपाठी ने उनका स्वागत किया। इस दौरान गोल्डी सिंह भी हेलीकॉप्टर से पहुंचे। मां पूर्वी देवी के दर्शन के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने क्षेत्र के लोगों से मुलाकात की और अपने पूर्वजों के इतिहास को लेकर चर्चा की।
रंजीत पूर्वा से गोंडा तक का बताया पारिवारिक इतिहास
बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि उनके पूर्वज उन्नाव की पुरवा तहसील स्थित रंजीत पूर्वा गांव से गोंडा चले गए थे। उन्होंने अपने परिवार के इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि 1857 के दौर में अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के कारण उनके पूर्वजों को यहां से जाना पड़ा था। उनके मुताबिक, घर में बने ठाकुरद्वारे के जीर्णोद्धार के दौरान भी पूर्वजों से संबंधित जानकारियां सामने आई थीं।
उन्होंने कहा कि वह लंबे समय से अपने पूर्वजों के गांव और वहां रहने वाले परिवार से जुड़े लोगों की तलाश कर रहे हैं। कई पीढ़ियां गुजर जाने के बावजूद अपनी जड़ों से जुड़ने की इच्छा उनके मन में बनी हुई है।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि उन्हें इस बात पर गर्व है कि वह किसी राजा-महाराजा के वंशज होने का दावा नहीं करते, बल्कि अपनी जन्मभूमि और पूर्वजों की पहचान से जुड़ना चाहते हैं। यदि उन्हें अपने पूर्वजों का गांव और वहां रहने वाले लोग मिल जाते हैं, तो वह उनके साथ स्थायी संबंध बनाना चाहेंगे, ताकि आपसी मेल-मिलाप और आना-जाना बना रहे।
राष्ट्रकथा में शामिल होने के लिए किया आमंत्रित
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने एक राष्ट्रकथा आयोजन का जिक्र करते हुए स्थानीय लोगों को इसमें शामिल होने का निमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में अमीर-गरीब सहित हर वर्ग के लोग शामिल हो सकते हैं। उनके अनुसार, कार्यक्रम में आने वाले लोगों के भोजन और ठहरने की व्यवस्था आयोजकों की ओर से की जाएगी। उन्होंने कहा कि चाहे 10 हजार लोग आएं या 20 हजार, सभी के लिए व्यवस्था करने का प्रयास किया जाएगा।
उन्नाव से चुनाव लड़ने के सवाल पर बोले— राजनीति मेरा उद्देश्य नहीं
उन्नाव से चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर पत्रकारों ने सवाल किया तो बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि वह यहां चुनावी राजनीति के लिए नहीं आए हैं। उनका उद्देश्य मां पूर्वी देवी के दर्शन करना, स्थानीय लोगों से मिलना और अपने पूर्वजों की जन्मभूमि से संबंध तलाशना है।
स्थानीय विधायक अनिल सिंह की ओर से उनकी उम्र को लेकर की गई टिप्पणी पर उन्होंने प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया। वहीं, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के वर्ष 2027 के चुनाव संबंधी बयान और गोंडा के भवानी भीख के सपा में शामिल होने को लेकर पूछे गए सवालों पर भी उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की।
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर रखी अपनी राय
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और दिल्ली में जारी विरोध-प्रदर्शनों को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने नियुक्ति प्रक्रिया का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष को केवल इस्तीफे की मांग करने के बजाय जनता के बीच जाना चाहिए। उनके अनुसार, चुनाव जीतकर सत्ता में आने के बाद कानून में बदलाव किया जा सकता है।
स्कूलों के बंद होने और प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस मामले की विस्तृत जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह वर्तमान में न तो सांसद हैं और न ही विधायक, इसलिए सरकार से उनका नियमित संपर्क नहीं रहता।
जन्मभूमि से रिश्ता जोड़ने की जताई इच्छा
मां पूर्वी देवी मंदिर में दर्शन-पूजन और स्थानीय लोगों से मुलाकात के दौरान बृजभूषण शरण सिंह ने बार-बार अपने पूर्वजों की जन्मभूमि से जुड़ने की इच्छा जाहिर की। उनका कहना था कि पुरवा तहसील से गोंडा तक फैले पारिवारिक इतिहास की तलाश उनके लिए महज अतीत को जानने का विषय नहीं, बल्कि अपनी जड़ों और पुरानी पीढ़ियों से संबंध जोड़ने का प्रयास है।
अब क्षेत्र के लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि पूर्वजों के गांव और परिवार से जुड़े लोगों की तलाश में उन्हें कितनी सफलता मिलती है।


