मानक विहीन ढाबों पर उठे सवाल, जल्द होगा सत्य का उजागर
उन्नाव:- लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाली पत्रकारिता केवल समाचार प्रकाशित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में छिपे भ्रष्टाचार, अन्याय और जनहित से जुड़े मुद्दों को उजागर करना उसका मूल उद्देश्य होता है। पत्रकार फाइलों, दस्तावेजों और जमीनी हकीकत की गहराई से पड़ताल कर समाज के सामने सच लाने का कार्य करता है। गलत को गलत और सही को सही कहने का साहस ही सच्ची पत्रकारिता की पहचान है।
इसी क्रम में जनपद उन्नाव के सदर कोतवाली क्षेत्र से लेकर अचलगंज एवं गंगाघाट थाना क्षेत्रों के अंतर्गत नेशनल हाईवे किनारे संचालित कई ढाबों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सूत्रों के मुताबिक कुछ ढाबा संचालकों द्वारा मानक विहीन तरीके से खाद्य सामग्री परोसी जा रही है। आरोप है कि गर्म सब्जी, चाय, रोटी और अन्य खाद्य पदार्थों को प्रतिबंधित पॉलिथीन एवं ब्लैक प्लास्टिक में पैक कर ग्राहकों को दिया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्मी के मौसम में पॉलिथीन में पैक भोजन जल्दी खराब होने की संभावना रहती है, जिससे फूड प्वाइजनिंग जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार जब गर्म खाद्य पदार्थ प्लास्टिक या पॉलिथीन के संपर्क में आते हैं तो उनसे निकलने वाले हानिकारक रसायन भोजन में मिलकर शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार कई ढाबों पर ब्लैक प्लास्टिक एवं निम्न गुणवत्ता वाले प्लास्टिक बॉक्स का धड़ल्ले से प्रयोग किया जा रहा है। जबकि शासन स्तर पर पॉलिथीन के उपयोग पर प्रतिबंध लागू है। इसके बावजूद खुलेआम इसका इस्तेमाल कई सवाल खड़े कर रहा है। आखिर जिम्मेदार विभाग इस ओर ध्यान क्यों नहीं दे रहे हैं ?
लोगों का कहना है कि प्लास्टिक और पॉलिथीन में पैक भोजन धीरे-धीरे शरीर में गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकता है। हाई ब्लड प्रेशर, फूड प्वाइजनिंग तथा अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की आशंका लगातार जताई जा रही है।
अब बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर मानकों की अनदेखी कर ढाबों का संचालन क्यों किया जा रहा है ? प्रतिबंधित पॉलिथीन का उपयोग किसकी शह पर हो रहा है ? और जिम्मेदार विभाग कार्रवाई से क्यों बच रहे हैं ?
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार जल्द ही साक्ष्यों एवं तथ्यों के साथ पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।
ग्रामीण दृष्टि हिंदी समाचार पत्र
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