'गांधी स्मृति' से विपक्ष का बड़ा संदेश: छात्रों के समर्थन में एकजुट हुए सांसद, पेपर लीक और युवाओं पर कार्रवाई को लेकर सरकार पर साधा निशाना
नई दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की कर्मभूमि और शहादत स्थल गांधी स्मृति एक बार फिर लोकतांत्रिक आवाज़ों का केंद्र बना। देश के विभिन्न विपक्षी दलों के सांसद यहां एकत्र हुए और छात्र आंदोलन, पेपर लीक की घटनाओं तथा युवाओं पर हुई कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला।
विपक्षी सांसदों ने कहा कि गांधी स्मृति सत्य, अहिंसा और निडरता का सबसे बड़ा प्रतीक है, इसलिए इसी स्थान से देश के छात्रों और युवाओं के संघर्ष के प्रति एकजुटता व्यक्त की जा रही है।
सांसदों ने उन छात्रों के समर्थन में आवाज़ बुलंद की जिन्होंने कथित तौर पर भ्रष्ट व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली में अनियमितताओं के खिलाफ बेखौफ होकर संघर्ष किया। साथ ही उन्होंने पेपर लीक की घटनाओं से प्रभावित छात्रों के भविष्य पर चिंता जताई और उन परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की, जिन्होंने अपने बच्चों को खोया है।
विपक्षी नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी मांग रखने वाले युवाओं के साथ कठोर व्यवहार किया गया, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
सभा के दौरान विपक्षी सांसदों ने स्पष्ट संदेश दिया कि छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई में वे हर कदम पर उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, पेपर लीक पर सख्त कार्रवाई तथा युवाओं के हितों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
यह कार्यक्रम ऐसे समय में हुआ है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता, पेपर लीक की घटनाओं और युवाओं के भविष्य को लेकर बहस तेज़ है। विपक्ष ने गांधी स्मृति से सरकार को संदेश देते हुए कहा कि सत्य, अहिंसा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा।


