'जंतर-मंतर पर सफेद, संसद में काला'—अखिलेश यादव का भाजपा पर तीखा प्रहार, बोले: 'समझौता नहीं, संघर्ष होगा'
नई दिल्ली। संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को विपक्ष ने केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। काले वस्त्र पहनकर संसद पहुंचे विपक्षी सांसदों ने सरकार पर लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने और छात्रों के मुद्दों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। इस दौरान समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर अब तक का सबसे तीखा राजनीतिक हमला बोला।
अखिलेश यादव ने कहा, "वो सफेद कपड़ा लेकर गए जंतर-मंतर, हम काला कपड़ा लेकर संसद पहुंचे।"
उन्होंने आरोप लगाया कि देश के छात्रों, उनके माता-पिता, शुभचिंतकों और विपक्षी सांसदों के साथ जिस प्रकार का व्यवहार किया गया, वह लोकतंत्र की मूल भावना के विपरीत है और इसकी जितनी निंदा की जाए, कम है।
उन्होंने भाजपा सरकार के "अमृतकाल" के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह काल अब जनता के लिए "दु-शासन का काला काल" बन चुका है। उन्होंने कहा कि जनता की आवाज़ को दबाने, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर बढ़ते दबाव को देश देख रहा है।
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन में कहा कि भाजपा और उसके सहयोगियों के शासन को इतिहास सम्मानजनक स्थान नहीं देगा। उनका दावा था कि आने वाली पीढ़ियां इस दौर को लोकतांत्रिक मूल्यों पर सबसे बड़े हमलों में से एक के रूप में याद करेंगी।
प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की। विपक्ष का कहना है कि छात्रों, युवाओं और लोकतांत्रिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सरकार जवाब देने से बच रही है, जबकि सरकार इन आरोपों से लगातार इनकार करती रही है।
अपने संबोधन के अंत में अखिलेश यादव ने संघर्ष का आह्वान करते हुए कहा—"समझौता नहीं; संघर्ष होगा!"
इस बयान के बाद संसद परिसर का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया। विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर उनका विरोध प्रदर्शन आगे भी जारी रहेगा।


