15 दिन में देनी होगी गंभीर आपराधिक मामलों वाले अधिवक्ताओं की सूची, आदेश की अवहेलना पर बार एसोसिएशन की मान्यता तक हो सकती है समाप्त
ग्रामीण दृष्टि हिंदी समाचार | प्रयागराज/लखनऊ | विशेष संवाददाता
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक महत्वपूर्ण आदेश के अनुपालन में बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश ने प्रदेश की सभी संबद्ध एवं मान्यता प्राप्त बार एसोसिएशनों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। इस आदेश के बाद पूरे प्रदेश के अधिवक्ता संगठनों में हलचल तेज हो गई है। अब प्रत्येक बार एसोसिएशन को अपने यहां ऐसे अधिवक्ताओं का पूरा विवरण 15 दिनों के भीतर बार काउंसिल को उपलब्ध कराना होगा, जिनके विरुद्ध गंभीर आपराधिक मामलों में एफआईआर दर्ज है, चार्जशीट दाखिल हो चुकी है अथवा जिनके विरुद्ध न्यायालय में विचारण (ट्रायल) लंबित है।
यह निर्देश इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा याचिका संख्या 12231/2025, मो. कफील बनाम स्टेट ऑफ उत्तर प्रदेश एवं अन्य में 03 जून 2026 को पारित आदेश के अनुपालन में जारी किया गया है। इस संबंध में 23 जुलाई 2026 को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव द्वारा प्रदेश के सभी बार एसोसिएशनों को आधिकारिक पत्र भेजा गया।
बार एसोसिएशनों को दी गई सख्त चेतावनी
बार काउंसिल ने अपने पत्र में स्पष्ट शब्दों में कहा है कि यदि कोई बार एसोसिएशन निर्धारित समय सीमा के भीतर मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराती है, तो इसे माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना माना जाएगा।
ऐसी स्थिति में संबंधित बार एसोसिएशन के विरुद्ध निम्न कार्रवाई की जा सकती है—
- बार एसोसिएशन का संबद्धीकरण (Affiliation) निरस्त किया जा सकता है।
- उसके सदस्यों को बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलेगा।
- आदेश की अवहेलना की रिपोर्ट इलाहाबाद उच्च न्यायालय को भेजी जाएगी।
- आवश्यक होने पर आगे की विधिक कार्रवाई भी की जा सकती है।
प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई प्रतिलिपि
इस आदेश की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसकी प्रतिलिपि केवल बार एसोसिएशनों तक ही सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि प्रदेश के सभी—
- जिला जज,
- जिलाधिकारी,
- पुलिस आयुक्त,
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक,
- उपजिलाधिकारी,
- तहसीलदार
को भी सूचना एवं आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। साथ ही जिला जज एवं जिलाधिकारियों से अनुरोध किया गया है कि वे अपने-अपने जनपद एवं तहसीलों की सभी बार एसोसिएशनों तक यह आदेश तत्काल पहुंचाना सुनिश्चित करें।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश अधिवक्ता समुदाय में पारदर्शिता, जवाबदेही और न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। इससे गंभीर आपराधिक मामलों का सामना कर रहे अधिवक्ताओं का रिकॉर्ड व्यवस्थित रूप से संकलित होगा और न्यायिक संस्थाओं के समक्ष स्पष्ट स्थिति उपलब्ध रहेगी।
हालांकि, यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि एफआईआर या आरोपपत्र दर्ज होना किसी व्यक्ति के दोषी सिद्ध होने के बराबर नहीं होता। अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाता है।
प्रदेशभर की बार एसोसिएशनों में बढ़ी सक्रियता
बार काउंसिल का यह आदेश जारी होने के बाद उत्तर प्रदेश की विभिन्न जिला एवं तहसील बार एसोसिएशनों में आवश्यक सूचनाएं जुटाने की प्रक्रिया तेज होने की संभावना है। कई बार एसोसिएशन अब अपने सदस्यों के अभिलेखों का परीक्षण कर निर्धारित समय के भीतर सूची भेजने की तैयारी में जुट सकती हैं।


