21 अगस्त की सुबह स्वस्थ दिखे थे राजेश, 22 अगस्त को रिश्तेदारों से मिली मौत की खबर; पोस्टमार्टम के बाद शव सीधे रसूलाबाद घाट पहुंचने पर बहन ने मांगी उच्चस्तरीय जांच
प्रयागराज। पुलिस लाइन प्रयागराज में तैनात वायरलेस इंस्पेक्टर राजेश कुमार चौरसिया (P.No. 971021136) की मौत के बाद परिस्थितियों को लेकर कई सवाल सामने आए हैं। मृतक की छोटी बहन और पत्रकार पूनम चौरसिया ने अपने इकलौते भाई की मृत्यु की परिस्थितियों पर गंभीर आशंका जताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित प्रयागराज के पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी, मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक और मुख्य चिकित्सा अधिकारी प्रयागराज को शिकायत भेजकर निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
पूनम चौरसिया का कहना है कि उन्होंने 21 अगस्त 2026 की सुबह अपने भाई को स्वस्थ अवस्था में देखा था। उन्हें उस समय इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि कुछ ही समय बाद परिस्थितियां इतनी बदल जाएंगी कि अगले दिन उन्हें अपने इकलौते भाई की मौत की खबर भी सीधे परिवार से नहीं, बल्कि रिश्तेदारों से मिलेगी।
यही घटनाक्रम अब कई सवालों का कारण बन गया है। बहन का कहना है कि यदि मृत्यु सामान्य परिस्थितियों में हुई है तो निष्पक्ष जांच से पूरी स्थिति स्वतः स्पष्ट हो जाएगी, लेकिन यदि किसी प्रकार की अनहोनी हुई है तो उसका सच सामने आना भी जरूरी है।
सुबह स्वस्थ दिखे, फिर अचानक मौत की खबर
पूनम चौरसिया के अनुसार, 21 अगस्त की सुबह राजेश कुमार चौरसिया सामान्य और स्वस्थ दिखाई दे रहे थे। इसके बाद वह अपने काम के सिलसिले में चले गए। रात तक उनके घर नहीं लौटने पर परिवार के लोगों को चिंता होने लगी। पूनम का कहना है कि राजेश की दोनों गाड़ियां घर पर ही खड़ी थीं। घर में भी उन्हें ऐसी गतिविधि दिखाई नहीं दी, जिससे उन्हें स्थिति सामान्य लगती। इसके बाद उन्होंने भाई के संबंध में जानकारी हासिल करने का प्रयास किया।
लेकिन 22 अगस्त को दोपहर लगभग 12:30 बजे उन्हें भाई की मौत की जानकारी मिली। उनका आरोप है कि मृत्यु की जानकारी उन्हें सीधे और समय पर नहीं दी गई, बल्कि रिश्तेदारों से मिली। एक बहन के लिए यह स्थिति इसलिए भी असामान्य प्रतीत हुई क्योंकि वह राजेश की इकलौती बहन होने के साथ उसी मकान में रहती थीं।
“अपने इकलौते भाई की मौत की खबर भी रिश्तेदारों से मिली”
पूनम चौरसिया ने अपनी शिकायत में इसी बिंदु को प्रमुखता से उठाया है। उनका कहना है कि उनके भाई की मृत्यु के बाद उन्हें तत्काल सूचना क्यों नहीं दी गई, यह जांच का महत्वपूर्ण विषय होना चाहिए। उनके अनुसार, वह भाई की अंतिम यात्रा के लिए घर पर इंतजार कर रही थीं। बाद में रिश्तेदारों के माध्यम से जानकारी मिली कि राजेश कुमार चौरसिया का शव स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस में रखा गया है। पूनम का कहना है कि उन्हें पोस्टमार्टम की प्रक्रिया और शव की स्थिति के संबंध में भी स्पष्ट जानकारी सीधे परिवार की ओर से नहीं मिली।
उनका सवाल है कि आखिर ऐसी कौन-सी परिस्थिति थी जिसके चलते उन्हें अपने भाई की मृत्यु की सूचना समय पर नहीं मिल सकी?
हालांकि इन परिस्थितियों के पीछे वास्तविक कारण क्या था, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसका उत्तर संबंधित पक्षों के बयान और जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं बहन, फिर सीधे घाट ले जाया गया शव
पूनम के मुताबिक, 23 अगस्त की सुबह लगभग 11 बजे वह स्वरूप रानी मेडिकल कॉलेज के पोस्टमार्टम हाउस पहुंचीं। उन्होंने बताया कि शाम लगभग 6:30 बजे पोस्टमार्टम हाउस से शव बाहर निकाला गया। इसके बाद उनके अनुसार शव को घर लाने के बजाय सीधे रसूलाबाद घाट अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। यही घटनाक्रम उनकी आशंका को और बढ़ाने वाला बताया जा रहा है। पूनम का सवाल है कि जब परिवार का घर मौजूद था और वह स्वयं वहां मौजूद थीं तो शव को घर क्यों नहीं लाया गया?
उनका कहना है कि अंतिम दर्शन और पारिवारिक रीति-रिवाजों के लिए शव को घर ले जाने की प्रक्रिया क्यों नहीं अपनाई गई, इसकी जानकारी उन्हें स्पष्ट रूप से नहीं दी गई। यह सवाल भी जांच का विषय हो सकता है कि शव को पोस्टमार्टम हाउस से सीधे घाट ले जाने का निर्णय किसने लिया, किस परिस्थिति में लिया और इसकी जानकारी परिवार के सभी सदस्यों को किस प्रकार दी गई।
रसूलाबाद घाट पर भी दिखी अलग तस्वीर
पूनम चौरसिया के अनुसार, अंतिम संस्कार के दौरान भी उन्हें कुछ परिस्थितियां असामान्य लगीं। उनका दावा है कि शव को कंधा देने की स्थिति सामान्य पारिवारिक अंतिम संस्कार से अलग दिखाई दी और पुलिस अधिकारियों तथा मृतक के बड़े बेटे ने शव को कंधा दिया। घाट पर राजेश कुमार चौरसिया को पुलिस की ओर से सलामी भी दी गई। एक पुलिस अधिकारी के अंतिम संस्कार में विभागीय सम्मान दिया जाना अपने आप में असामान्य नहीं माना जा सकता, लेकिन पूनम का कहना है कि मृत्यु से पहले और बाद की घटनाओं की पूरी श्रृंखला को एक साथ देखा जाना चाहिए।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि अंतिम संस्कार की इन परिस्थितियों से किसी अपराध का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। वास्तविक स्थिति जांच और उपलब्ध साक्ष्यों से ही निर्धारित की जा सकती है।
पारिवारिक विवादों का भी शिकायत में उल्लेख
पूनम चौरसिया ने अधिकारियों को दी गई शिकायत में परिवार के भीतर पहले से चले आ रहे कथित विवादों का भी उल्लेख किया है। शिकायत के अनुसार, राजेश कुमार चौरसिया, उनकी पत्नी सुधा चौरसिया, विकास चौरसिया, शिवम चौरसिया और बहन मंजू जायसवाल के बीच कथित रूप से विभिन्न दीवानी, फौजदारी और घरेलू विवादों से जुड़े न्यायालयीन मामले रहे हैं।पूनम ने यह भी दावा किया है कि उन्हें पूर्व में ताला तोड़ने, संपत्ति से बेदखल करने, झूठे मुकदमे में फंसाने और जान से मारने जैसी कथित धमकियां दी गई थीं।
इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के माध्यम से ही हो सकती है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध केवल शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार पर दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
लेकिन शिकायतकर्ता का कहना है कि पूर्व विवादों की पृष्ठभूमि को देखते हुए उनके भाई की मृत्यु की परिस्थितियों की निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है।
CCTV फुटेज से मिल सकती है अहम जानकारी
पूनम चौरसिया ने जांच एजेंसियों के सामने सबसे महत्वपूर्ण मांगों में CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की बात कही है। उनका कहना है कि घर में CCTV कैमरे लगे हुए हैं। ऐसे में 21 अगस्त की सुबह से लेकर अंतिम संस्कार तक की उपलब्ध CCTV फुटेज को सुरक्षित कराया जाना चाहिए।
यदि संबंधित स्थानों पर CCTV रिकॉर्डिंग उपलब्ध है तो उससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि राजेश कुमार चौरसिया घर से कब निकले, किन परिस्थितियों में रहे, कौन-कौन लोग उनके संपर्क में आए और मृत्यु की सूचना के बाद घर तथा परिवार के स्तर पर क्या गतिविधियां हुईं।
इसी के साथ पोस्टमार्टम हाउस, अस्पताल और अन्य संबंधित स्थानों पर उपलब्ध CCTV रिकॉर्डिंग की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
मोबाइल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की मांग
पूनम ने अपने भाई की मृत्यु से पहले की गतिविधियों को समझने के लिए मोबाइल फोन तथा अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच की भी मांग की है। उनका कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर CDR, मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड, संदेश और मृत्यु से पहले के संपर्कों की जांच की जाए। ऐसे डिजिटल साक्ष्य जांच एजेंसी को घटनाक्रम की समय-रेखा समझने में मदद कर सकते हैं। हालांकि किसी व्यक्ति से संपर्क होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं होता। इसलिए डिजिटल रिकॉर्ड का मूल्यांकन अन्य साक्ष्यों के साथ किया जाना आवश्यक होगा।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिकी निगाहें
मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज हो सकती है। मृत्यु का चिकित्सकीय कारण क्या बताया गया है, शरीर पर किसी प्रकार की चोट के निशान का उल्लेख है या नहीं, मृत्यु का अनुमानित समय क्या है और अन्य चिकित्सकीय निष्कर्ष क्या हैं—इन सभी पहलुओं की जांच आवश्यक है। पूनम चौरसिया ने अधिकारियों से पोस्टमार्टम रिपोर्ट और संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड की निष्पक्ष समीक्षा कराने की मांग की है।
यदि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और घटनाक्रम के बीच कोई विरोधाभास दिखाई देता है तो जांच एजेंसी उसके कारणों की पड़ताल कर सकती है।
“किसी को दोषी नहीं ठहरा रही, केवल सच सामने आना चाहिए”
पूनम चौरसिया का कहना है कि वह जांच पूरी होने से पहले किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा रही हैं। उनकी मांग केवल यह है कि उनके भाई की मृत्यु के पीछे वास्तविक परिस्थितियां सामने आएं।
उनका कहना है कि यदि राजेश कुमार चौरसिया की मृत्यु सामान्य कारणों से हुई है तो निष्पक्ष जांच से यह बात स्पष्ट हो जाएगी और परिवार की आशंकाओं का भी समाधान हो जाएगा। लेकिन यदि जांच में कोई आपराधिक पहलू सामने आता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अधिकारियों से स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग
पत्रकार बहन ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित संबंधित अधिकारियों से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनकी मांग है कि जांच किसी पूर्वाग्रह के बिना की जाए और मृत्यु से पहले की घटनाओं से लेकर पोस्टमार्टम तथा अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया को जांच के दायरे में रखा जाए।
इसके साथ ही CCTV फुटेज सुरक्षित कराने, मेडिकल रिकॉर्ड की जांच, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के परीक्षण, मोबाइल एवं डिजिटल रिकॉर्ड की जांच तथा संबंधित लोगों के बयान दर्ज कराने की मांग की गई है।
जांच के बाद ही सामने आएगा मौत का सच
राजेश कुमार चौरसिया की मौत के बाद उठे सवाल फिलहाल शिकायतकर्ता की आशंकाओं और उपलब्ध घटनाक्रम पर आधारित हैं। किसी भी व्यक्ति को दोषी ठहराने या मौत को आपराधिक घटना घोषित करने से पहले आधिकारिक जांच और चिकित्सकीय साक्ष्यों का सामने आना आवश्यक है। फिर भी यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि एक पुलिस अधिकारी की मृत्यु के बाद उनकी इकलौती बहन ने सूचना देने की प्रक्रिया, पोस्टमार्टम से संबंधित जानकारी, शव को घर न लाए जाने और अंतिम संस्कार तक की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि 21 अगस्त की सुबह राजेश कुमार चौरसिया की वास्तविक गतिविधियां क्या थीं, उनकी मृत्यु कब और किन परिस्थितियों में हुई, परिवार को सूचना देने की प्रक्रिया क्या रही, पोस्टमार्टम की पूरी प्रक्रिया कैसे हुई और शव को सीधे रसूलाबाद घाट ले जाने का निर्णय किन परिस्थितियों में लिया गया।
इन सभी सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकता है।
पूनम चौरसिया का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना या दोषी ठहराना नहीं, बल्कि अपने इकलौते भाई की मृत्यु का सच जानना है। उनका कहना है कि एक पुलिस अधिकारी की मृत्यु के मामले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है।
अब निगाहें प्रशासनिक और पुलिस जांच पर हैं। यदि संबंधित अधिकारी शिकायत में उठाए गए सवालों की बिंदुवार जांच करते हैं तो घटनाक्रम की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है। परिवार को भी यही उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष होगी और राजेश कुमार चौरसिया की मौत को लेकर उठ रहे सभी सवालों का तथ्यात्मक जवाब मिलेगा।

