देशभक्ति से लेकर मोहब्बत और व्यंग्य तक बिखरे काव्य के रंग, कवियों ने रचनाओं से साहित्यकार को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि
अचलगंज। साहित्य की धरती बेथर में गुरुवार की रात कविता, देशभक्ति, हास्य-व्यंग्य और प्रेम की भावनाओं का अनूठा संगम देखने को मिला। हिन्दी साहित्य के पुरोधा पंडित प्रताप नारायण मिश्र की जयंती के अवसर पर उनके पैतृक गांव बेथर में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों ने अपनी दमदार रचनाओं से देर रात तक समां बांधे रखा। कभी राष्ट्रभक्ति की गूंज सुनाई दी तो कभी व्यंग्य के तीर चले और कभी प्रेम की नजाकत ने श्रोताओं को भावुक कर दिया।
कार्यक्रम में कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से पंडित प्रताप नारायण मिश्र के साहित्यिक योगदान को नमन करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। मंच पर जैसे-जैसे कवियों की प्रस्तुतियां आगे बढ़ीं, श्रोताओं की तालियों और वाहवाही से पूरा वातावरण गूंजता रहा।
तिरंगे और मातृभूमि के प्रेम से भर दिया माहौल
कवि उमाशंकर यादव ने अपनी ओजपूर्ण रचना “जय हिंद, जय हिंद, मातु भारती की जय” सुनाकर श्रोताओं में राष्ट्रभक्ति का संचार कर दिया। तिरंगे और भारत माता के प्रति समर्पित उनकी पंक्तियों पर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाईं।
व्यंग्य के तीरों से गुदगुदाया
कवि रामेश्वर द्विवेदी ‘प्रलयंकर’ ने समसामयिक व्यवस्था पर व्यंग्य करते हुए “फ्री का है राशन, फ्री पेंशन, किसान निधि...” जैसी पंक्तियां सुनाईं। उनकी व्यंग्यात्मक प्रस्तुति ने श्रोताओं को खूब गुदगुदाया और सामाजिक परिस्थितियों पर सोचने को भी मजबूर किया।
मोहब्बत की डोरी पर कवयित्री ने बांधा समां
बाराबंकी से आईं कवयित्री हेमा कीर्ति पाण्डेय ने प्रेम पर आधारित अपनी रचना से माहौल को भावुक कर दिया। “मोहब्बत की ये डोरी है, इसे कमजोर मत करना...” जैसी पंक्तियों के जरिए उन्होंने आज के दौर की मोहब्बत और रिश्तों की नजाकत को अपने खास अंदाज में पेश किया। उनकी प्रस्तुति को भी श्रोताओं की खूब सराहना मिली।
चंद्रशेखर आजाद के बलिदान को किया नमन
काकोरी से आए कवि अशोक अग्निपथि ने क्रांतिवीर शहीद चंद्रशेखर आजाद को समर्पित ओजपूर्ण रचना प्रस्तुत की। उनकी कविता में आजादी के लिए दिए गए बलिदान की गूंज सुनाई दी। प्रस्तुति के दौरान श्रोताओं में देशभक्ति का जोश देखने को मिला।
‘बेथर की माटी चंदन-चंदन सी’ से मिश्र जी को किया नमन
बाराबंकी के कवि राम किशोर तिवारी ने पंडित प्रताप नारायण मिश्र को समर्पित रचना प्रस्तुत कर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा—
“पंडित प्रताप नारायण जी का वंदन है, अभिनंदन है, जिसको पाकर महक उठी माटी बेथर की चंदन-चंदन सी।”
इन पंक्तियों के माध्यम से उन्होंने पंडित प्रताप नारायण मिश्र की जन्मभूमि बेथर की साहित्यिक विरासत को नमन किया।
देर रात तक चलता रहा काव्य का सिलसिला
कवि सम्मेलन का सिलसिला देर रात तक चलता रहा और श्रोता अपनी जगह पर डटे रहे। अध्यक्षता रामेश्वर द्विवेदी ‘प्रलयंकर’ ने की, जबकि संचालन राम किशोर तिवारी ने किया। आयोजक हरि सहाय मिश्र ‘मदन’ ने देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए कवियों का अंगवस्त्र भेंटकर सम्मान किया। उन्होंने अतिथियों, कवियों और श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
पंडित प्रताप नारायण मिश्र की जन्मभूमि बेथर में आयोजित यह कवि सम्मेलन साहित्य और संस्कृति के प्रति समर्पण का जीवंत उदाहरण बना। रात बढ़ती रही, लेकिन कविता का रंग और श्रोताओं का उत्साह कम नहीं हुआ।
रिपोर्ट - राकेश कुमार तिवारी


