हिन्दी पखवाड़े में रसूलपुर रूरी राजकीय महाविद्यालय में हुआ आयोजन, नारी सम्मान से लेकर राष्ट्र चेतना तक कविताओं में दिखे विविध रंग
बांगरमऊ, उन्नाव। हिन्दी पखवाड़े के अंतर्गत शुक्रवार को श्री विशम्भर दयाल त्रिपाठी राजकीय महाविद्यालय, रसूलपुर रूरी में हिन्दी एवं समाजशास्त्र विभाग के संयुक्त तत्वावधान में महिला सशक्तिकरण विषयक गोष्ठी एवं स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जहां महिला सम्मान, समानता, शिक्षा और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर गंभीर विमर्श हुआ, वहीं विद्यार्थियों ने अपनी स्वरचित कविताओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
महिला सशक्तिकरण को बताया समतामूलक समाज की आधारशिला
गोष्ठी में विद्वान अतिथियों एवं शिक्षकों ने महिला सशक्तिकरण के विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भरता उपलब्ध कराना केवल महिला हित का विषय नहीं है, बल्कि यह सशक्त, जागरूक और समतामूलक समाज के निर्माण की महत्वपूर्ण आधारशिला है।
वक्ताओं ने विद्यार्थियों को सामाजिक बदलाव में युवाओं की भूमिका के प्रति भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि महिला सम्मान और समानता की भावना परिवार से लेकर समाज तक मजबूत होने पर ही व्यापक सामाजिक परिवर्तन संभव है।
कविताओं में गूंजा राष्ट्रप्रेम और नारी स्वाभिमान
गोष्ठी के बाद आयोजित स्वरचित काव्यपाठ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। किसी कविता में राष्ट्रप्रेम और राष्ट्र चेतना की अभिव्यक्ति देखने को मिली तो किसी रचना में नारी संघर्ष, सम्मान और स्वाभिमान की आवाज मुखर हुई।
विद्यार्थियों की कविताओं में सामाजिक विसंगतियों, युवा चेतना, प्रकृति और मानवीय संवेदनाओं जैसे विषय भी प्रमुखता से उभरे। भावपूर्ण काव्य प्रस्तुतियों ने उपस्थित श्रोताओं को प्रभावित किया।
प्रतियोगिता में छात्र हर्ष श्रीवास्तव, जितेन्द्र, गीतेश पटेल, कौशिक द्विवेदी, आदर्श, आंचल सिंह, प्रतीक श्रीवास्तव और गुड़िया सहित अन्य विद्यार्थियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया।
काव्य मंच ने खोजीं नई रचनात्मक प्रतिभाएं
काव्यपाठ के दौरान विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता सामने आई। कई प्रतिभागियों की प्रस्तुतियों में साहित्य के प्रति रुचि और सामाजिक विषयों को अभिव्यक्त करने की प्रभावी क्षमता देखने को मिली। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा को मंच देने के साथ-साथ साहित्य और समाज के बीच संबंध को समझने का अवसर भी प्रदान किया।
हिन्दी पखवाड़े के इस आयोजन में साहित्य, महिला चेतना, सामाजिक सरोकार और युवा प्रतिभा का सुंदर संगम देखने को मिला। कार्यक्रम ने उपस्थित लोगों के बीच हिन्दी भाषा एवं साहित्य के प्रति रुचि को भी मजबूत किया।
ये रहे उपस्थित
इस अवसर पर डॉ. अरविन्द कुमार, विनीत कुमार, डॉ. अनुराग रावत, डॉ. कुलदीप कुमार शुक्ला, डॉ. सुनील कुमार, डॉ. पंकज कुमार मिश्रा, अनिल कुमार सहित महाविद्यालय के शिक्षक एवं अन्य लोग उपस्थित रहे और कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।
रिपोर्ट - राकेश कुमार तिवारी


