सई नदी का जलस्तर बढ़ा, पांच सौ बीघा फसल जलमग्न; कई गांवों का संपर्क टूटा
असोहा, उन्नाव। सई नदी में लगातार बढ़ रहे जलस्तर ने असोहा ब्लॉक क्षेत्र के ग्रामीणों और किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। बीते चार दिनों से नदी का पानी लगातार बढ़ने के कारण दर्जनों गांवों की पांच सौ बीघा से अधिक धान, उड़द और मूंग की फसल पानी में डूब गई है। वहीं असोहा-नयाखेड़ा संपर्क मार्ग पर करीब तीन फीट ऊपर तक पानी तेज बहाव के साथ सड़क के ऊपर से गुजर रहा है, जिससे नदी पार बसे कई गांवों का ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया है।
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| असोहा-नयाखेड़ा मार्ग पर सड़क के ऊपर से तेज बहाव के साथ बहता सई नदी का पानी। |
जानकारी के अनुसार सई नदी के बढ़ते जलस्तर से गोमापुर, नयाखेड़ा, बिलौरा, चौपई, मंझरिया, सैरैया प्राचीन, भाऊमऊ, जबरेला, लच्छीपुर, धन्नीपुर और कोटवा समेत कई गांवों के किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। खेतों में पानी भरने से किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है।
तीन फीट ऊपर से बह रहा पानी, कई गांवों का संपर्क प्रभावित
असोहा-नयाखेड़ा होकर लखनऊ जाने वाले संपर्क मार्ग पर स्थिति गंभीर बनी हुई है। सड़क के ऊपर करीब तीन फीट तक पानी तेज बहाव के साथ बह रहा है। इसके चलते बिलौरा, चौपई, मंझरिया, पहाड़पुर, गोमापुर, चिलौली, दरेहटा और ओगरापुर ग्राम पंचायतों का ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हो गया है।
ग्रामीणों के आवागमन के लिए सई नदी पार जाने वाले कोटवा-लच्छीपुर, असोहा-नयाखेड़ा और धन्नीखेड़ा-गोमापुर मार्ग भी नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद लगभग बंद हो गए हैं।
बहते पानी में रील और स्टंट बना रहे लोग
सड़क पर तेज बहाव के बावजूद बड़ी संख्या में लोग पानी देखने पहुंच रहे हैं। कई युवक बाइक से पानी के बीच स्टंट करने और रील बनाने में जुटे हैं। शुक्रवार को असोहा क्षेत्र के चार युवक बाइक समेत बहते पानी में फंसकर हादसे का शिकार होने से बाल-बाल बच गए।
इसके बावजूद लोग खतरे की अनदेखी कर सड़क पर बह रहे पानी में पहुंच रहे हैं। बच्चे भी पानी में उतरकर मौज-मस्ती कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी का बहाव तेज होने के कारण जरा सी लापरवाही गंभीर हादसे का कारण बन सकती है।
किसानों को फसल बर्बाद होने की चिंता
सई नदी का पानी खेतों में भरने से किसानों की मेहनत पर संकट खड़ा हो गया है। धान, उड़द और मूंग की सैकड़ों बीघा फसल जलमग्न होने से किसानों को आर्थिक नुकसान की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावित क्षेत्रों में जलस्तर और आवागमन की स्थिति पर नजर रखने तथा जरूरत पड़ने पर सुरक्षा व्यवस्था किए जाने की मांग की है।
स्थानीय ग्रामीणों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता सड़क पर तेज बहाव के बीच आवागमन और खेतों में लगातार बढ़ता पानी है।


